Rabindranath Tagore । रविंद्रनाथ टैगोर की पूरी हिस्ट्री

By | May 15, 2020

टैगोर का जीवन परिचय Rabindranath Tagore Life

Rabindranath Tagore ,rabindranath tagore biography,information about rabindranath tagore in hindi, रविंद्रनाथ टैगोर का जन्म date of birth of rabindranath tagore 7 मई 1861 को कोलकाता शहर में हुआ था. रविंद्रनाथ टैगोर के पिताजी का नाम देवेंद्रनाथ टैगोर था और उनकी माता का नाम शारदा देवी था। रविंद्रनाथ टैगोर अपने सभी भाई बहनों में सबसे छोटे थे।

उन्होंने अपनी माता को बचपन में ही खो दिया था उनके पिता एक यात्री थे इसी वजह से उनके पिता घर पर ज्यादा देर तक रुकते नहीं थे। इसीलिए उनकी परवरिश घर के बाकी सदस्यों और घर के नौकरों द्वारा की गई । टैगोर ने मृणालिनी देवी नाम की औरत से शादी की थी।

रविंद्रनाथ टैगोर की शिक्षा rabindranath tagore biography

Rabindranath Tagore । रविंद्रनाथ टैगोर

उनकी प्रारंभिक शिक्षा सेंट जेवियर स्कूल से हुई थी उसके बाद में आगे की शिक्षा के लिए उन्होंने ब्राइटन ईस्ट सक्सेस इंग्लैंड में एक पब्लिक स्कूल में एडमिशन लिया था।

उनकी बैरिस्टर बनने की इच्छा थी इसके लिए वे इंग्लैंड के ब्रिजटोन स्कूल में एडमिशन लिया साथ ही उन्होंने लंदन कॉलेज विश्वविद्यालय से कानून का अध्ययन, लॉ की शिक्षा ली। उन्होंने सन 1880 में इस डिग्री को पूरा नहीं किया और बिना डिग्री हासिल किए ही वापस अपने देश लौट आए।

रविंद्रनाथ टैगोर Rabindranath Tagore को बचपन से ही कविताएं, कहानियां लिखने का शौक रहा था वह दुनिया में गुरुदेव के नाम से विख्यात हुए। रविंद्रनाथ टैगोर के पिता समाज सुधारक के रूप में भी जाने जाते थे, उनके पिता चाहते थे कि वह बड़े होकर बैरिस्टर बने इसीलिए बैरिस्टर बनने की इच्छा लिए हुए रविंद्रनाथ टैगोर इंग्लैंड पढ़ाई के लिए गए लेकिन बिना डिग्री लिए ही वापस आ गए।

पहली कविता 8 साल की उम्र में लिखी

माना जाता है रविंद्र नाथ टैगोर ने अपनी पहली कविता 8 साल की उम्र में लिखी थी। इसके बाद 16 वर्ष की उम्र में टैगोर जी ने नाटक और कहानियां लिखना शुरू कर दिया था। आमतौर पर उन्हें बीसवीं शताब्दी के शुरुआती दौर में भारत के उत्कृष्ट और रचनात्मक कलाकार के रूप में भी जाना जाता था।

दो देशो के राष्ट्रगान के रचयता

Rabindranath Tagore रविंद्रनाथ टैगोर tagore को एक ऐसे कवि के रूप में भी जाना जाता है जिनकी रचनाओं को दो अलग देशों ने अपना राष्ट्रगान बनाया। भारत के राष्ट्रगान के रचयिता रबीन्द्रनाथ टैगोर [rabindra nath tagore] है और साथ ही पड़ोसी देश बांग्लादेश के राष्ट्रगान के रचयिता भी रविंद्र नाथ टैगोर है

राजनीति मे योगदान

रविंद्रनाथ टैगोर का राजनीति की ओर भी रुझान था, रविंद्रनाथ टैगोर एक सक्रिय राजनीतिक भी थे। वह भारत के जितने भी राष्ट्रवादी नेता थे उनका पूर्ण समर्थन करते थे और ब्रिटिश साम्राज्य का विरोध करते थे। उन्होंने कई प्रकार के देशभक्ति गीत भी लिखे थे। उन्होंने देश के लिए और भारतीय स्वतंत्रता के लिए कहीं प्रेरणादायक गीत और कविताएं भी लिखी।

टैगोर साहब की प्रसिद्ध कविता

पिंजरे की चिड़िया थी सोने के पिंजरे में

वन की चिड़िया थी वन में

एक दिन हुआ दोनों का सामना

क्या था विधाता के मन में

पिंजरे की चिड़िया थी सोने के पिंजरे में यह कविता भी खूब लोकप्रिय हुई और इस कविता से लोगों को प्रेरणा मिली।

1877 में उन्होंने भिखारिन और 1782 में कविताओं का संग्रह संध्या जगत लिखा। जिनसे उनको काफी प्रसिद्धि मिली। टैगोर ने इंग्लिश, आइरिश, स्कॉटिश, साहित्य और संगीत को भी सीखा।

टैगोर ने 1901 में पश्चिम बंगाल के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित शांति निकेतन में एक प्रायोगिक विद्यालय की स्थापना भी की थी, उन्होंने उस विद्यालय के माध्यम से भारत और पश्चिमी परंपराओं के सर्वोच्च सर्वश्रेष्ठ को मिलाने का प्रयास भी किया था। इसके बाद वे विद्यालय में ही रहने लगे और 1921 में यह विद्यालय, विद्यालय से विश्व भारती विश्वविद्यालय के नाम से विख्यात हो गया।

टैगोर जी ने बंगला साहित्य में गद्य और छंद तथा कई भाषाओं की शुरुआत की। उन्होंने इस प्रकार शास्त्रीय संस्कृत पर आधारित पारंपरिक प्रारूपों से उन्हें मुक्ति दिलाई। उन्होंने कई पुस्तकों का प्रकाशन भी किया, उनमें से उनकी एक लोकप्रिय पुस्तक मानसी भी थी। उनकी कविताओं की पांडुलिपियों को सबसे पहले विलियम रोथेनस्टाइल ने पढ़ा था।

वह इन पांडुलिपियों को पढ़ने में इतने आकृषित हो गए थे कि उन्होंने अंग्रेजी के कवि यीट्स से तुरंत संपर्क किया और पश्चिम जगत के सभी लेखकों, कवियों, चित्रकारों आदि को टैगोर के बारे में बताया। इंडिया सोसाइटी से इसके प्रकाशन की व्यवस्था शुरू की गई थी। जिसकी 750 कॉपियां प्रारंभ में छापी गई थी उसके बाद में लंदन की एक कंपनी ने 1913 में इसे प्रकाशित किया था और 13 नवंबर 1913 को नोबेल पुरस्कार की घोषणा से पहले इसके 10 संस्करण छप चुके थे।

साहित्य नोबेल पुरस्कार

टैगोर की विश्व प्रसिद्ध काव्य रचना गीतांजलि के लिए उन्हें सन 1913 में साहित्य नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया। वह पहले गैर यूरोपीयन थे जिनको यह नोबेल पुरस्कार मिला था।

इस पुरस्कार को टैगोर ने सीधे ही अपने हाथों में नहीं लिया था उनकी और से ब्रिटेन के एक राजदूत ने इस पुरस्कार को अपने हाथों में लिया था और बाद में टैगोर को दिया गया था।

ब्रिटिश सरकार ने ही टैगोर को सर की उपाधि दी। सन 1919 में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद मे टैगोर ने सर की उपाधि को लौटा दिया था। इस पर ब्रिटिश सरकार ने उन्हें यह उपाधि नहीं लौटाने के लिए भी कहा था लेकिन रविनाथ टैगोर जलियांवाला बाग हत्याकांड से इतने प्रभावित हुए थे कि उन्होंने सर की उपाधि तुरंत लौटा दी।

रविंद्रनाथ टैगोर का निधन

रविंद्र नाथ टैगोर का निधन एक कैंसर के कारण 7 अगस्त 1941 को हो गया था. उनकी मृत्यु की खबर लोगों को जैसे ही पता चली तो पूरे देश को सदमा लग गया था उस समय पूरा देश एक शोक की लहर में डूब गया था कि उन्होंने इतने महान आदमी को खो दिया है।

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