Lohagarh Fort History In Hindi । लोहागढ़ किले की जानकारी

By | May 31, 2020

लोहागढ़ किला का इतिहास । भारत का एक मात्र अजय दुर्ग

Lohagarh Fort History In Hindi राजस्थान में कई ऐसे दुर्ग और कलाकृतिया हैं जो अपनी सुंदरता और वीरता से भरी कहानियों के कारण लोगों का आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

राजस्थान के राजा-महाराजाओ ने अपने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए ऐसे किले व कलाकृतियों निर्माण किया, जिसे दुश्मन के तोप के गोले भी न भेद पाए। ऐसे ही राजस्थान के किलो मे एक किला है भरतपुर का लोहागढ़ किला।

Lohagarh Fort History In Hindi । लोहागढ़ किले के बारे में जानकारी

Loha Garh लोहागढ़ किला भारत का अजय दुर्ग कहलाता है जिसे आज तक किसे भी आक्रमणकारी ने जीत नहीं पाया और न ही इस किले का किसी ने भेद जान पाया 

Lohagarh Fort History In Hindi लोहागढ़ किला राजस्थान के भरतपुर शहर का एक प्रमुख किला है जिसका नाम मजबूत धातु लोहे के रूप में रखा गया है, और राजस्थान के इतिहास मे सभी दुर्गो व किलो मे लोहागढ़ का किला एक मात्र एसा किला है जिसके आगे अग्रेजों ने भी घुटने टेक दिये लोहागढ़ भारत का वो किला था जिस पर तोप के गोले भी हो जाते थे बेअसर, और अंग्रेजों ने भी मान ली थी हार।

लोहागढ़ का किला राजस्थान के सभी किलो मे सबसे मजबूत किला है जिसका भेद अग्रेज़ भी नहीं जान पाये थे। भरतपुर मे स्थित इस किले पर कई बार हमले हुये लेकिन भरतपुर की शान यह किला मजबूती से खड़ा रहा।

लोहागढ़ किला किसने बनवाया था – Who Bulit The Lohagarh Fort Bharatpur In Hindi

राजस्थान के भरतपुर मे स्थित लोहागढ़ किले का निर्माण 1733 को महाराजा सूरज मल द्वारा किया गया था तथा इस किले को आयरन फोर्ट  के नाम से भी जाना जाता है। लोहागढ़ किला पहाड़ी किलो मे से एक है मिट्टी का किला भी कहते है।

लोहागढ़ किले का इतिहास बहुत ही शाही रहा है। लोहगढ़ का किला ब्रिटिशो के आक्रमणों को झेलने के लिए भी जाना जाता है और यह किला भारतपुर मे शान्त व सुंदर वातावरण मे बना हुआ है।

इस किले को भारत का एकमात्र अजेय दुर्ग कहा जाता है, क्योंकि इसे कभी भी कोई जीत नहीं पाया।

यह किला मिट्टी का होने के कारण इस किले पर जितने भी आक्रमण गोला बारूद से हुये वो गोला बारूद मिट्टी मे ही दबकर खराब हो जाते थे इस कारण इस दुर्ग पर आज तक किसी ने भी विजय प्राप्त नहीं की।

लोहागढ़ किले की बनावट Lohagarh Fort History In Hindi

राजस्थान के भरतपुर मे स्थित इस किले को इतनी कुशलता के साथ बनाया गया है की कोई भी दुश्मन यदि इस किले पर आक्रमण करते है तो उनकी सारी कोशिश नाकाम हो जाए लोहागढ़ के किले की दीवारे मिट्टी से ढंकी थी, जिससे दुश्मनों की तोप के गोले इस मिट्टी में धंस जाते थे। और खराब हो जाते थे, यही हाल बंदूक की गोलियों का भी होता था। इसी कारण से यह दुर्ग इतना प्रसिद्ध हो गया।

loha garh ka kila लोहागढ़ के इस किले के चारो तरफ खाइया भी बनाई गई थी ताकि कोई दुश्मन किले मे प्रवेश न कर पाये और इन खाइयो मे पानी भी भर दिया गया था इतना ही नहीं कोई दुश्मन तैरकर भी किले तक न पहुंचे इसलिए इस पानी में मगरमच्छ छोड़े गए थे और एक ब्रिज बनाया गया था जिसमें एक दरवाजा था ।

किले की मुख्य दीवारों की ऊंचाई 100 फीट और चौड़ाई 30 फीट है. दीवारों का बाहरी हिस्सा ईंट और मोर्टार से बना हुआ है लेकिन आंतरिक हिस्सा मिट्टी से बना था। लोहगढ़ का किला मिट्टी का बना होने के कारण इसको मिट्टी का किला भी कहते है।

Lohagarh Fort History In Hindi । लोहागढ़ किले के बारे में जानकारी

लोहागढ़ किले के बारे मे रोचक बातें

  1. इस किले की दीवारों में आज भी तोप के गोले धंसे हुए हैं।
  2. अंग्रेजों ने इस किले को अपने साम्राज्य में लेने के लिए 13 बार हमले किए।
  3. इन आक्रमणों में एक बार भी वो इस किले को भेद न सके।
  4. लोहागढ़ भारत का एक मात्र अजयदुर्ग है।

लोहागढ़ किले पर आक्रमण (Attack on Lohgarh Fort)

राजस्थान के इस लोहगढ़ किले को पूर्व सिंहद्वार भी कहा जाता है। यहां जाट राजाओं की हुकूमत थी जो अपनी दृढ़ता के लिए जाने जाते हैं। इस किले पर अग्रेजों ने 13 बार आक्रमण किया और इस किले पर गोले बारूद छोड़े गए और यह गोले बारूद मिट्टी मे समा गए लॉर्ड लेक ने 1805 में छह हफ्तों के लिए किले की घेराबंदी की लेकिन इतने हमलों के बावजूद वह जीत हासिल नहीं कर पाए और अग्रेजों को पराजय का मुह देखना पड़ा। परंतु लोहगढ़ के इस किले का भेद अग्रेज़ भी नहीं जन पाये। और निराश होकर वापस लोट गए।

मराठो ने इस लोहगढ़ के किले पर कई बार आक्रमण किया लेकिन उनको सफलता नहीं मिली महाराजा रणजीत सिंह द्वारा जसवंत राव होल्कर को शरण देने से नाराज अंग्रेजो ने जनवरी 1805 से अप्रैल 1805 तक जनरल लेक के नेतृत्व में किले को घेरे रखा परन्तु उनको पराजय का मुह देखना पड़ा अंत मे राजा जाट से संधि कर ली।

लोहगढ़ किले के प्रसिद्ध महल

महल खास (Mahal Khas)

महल खास का निर्माण सूरज मल  ने करवाया था जिसने 1733 से 1763 तक शासन किया। इस महल की छतें घुमावधार थी यह सब निर्माण जाट वास्तुकला का एक हिस्सा था।

कामरा पैलेस (Kamra Palace)

कामरा पैलेस का इस्तेमाल हथियार और शस्त्रागार रखने के लिए किया जाता था और यह बदनसिंह महल के बगल मे बनाया गया था इसका निर्माण भी जाट राजाओं ने करवाया था।

बदन सिंह पैलेस (Badan Singh Palace)

बदन सिंह पैलेस का निर्माण राजा सूरज मल के पिता ने किले के उत्तर पश्चिमी  मे करवाया था सूरज मल के पिता ने 1722 से 1733 तक भरतपुर पर शासन किया।

गंगा मंदिर (Ganga temple)

गंगा मंदिर 1845 में राजा बलवंत सिंह द्वारा बनवाया गया था

जवाहर बुर्ज और फतेह बुर्ज (Jawahar Burj and Fateh Burj)

जवाहर बुर्ज का निर्माण राजा सवाई जवाहर सिंह ने 1765 में करवाया था और इसको मुगलों पर अपनी जीत की याद में बनवाया था. इन बुरजो का उपयोग राज्याभिषेक समारोह के लिए किया जाता था 1805 मे फतेह बुर्ज का निर्माण राजा रणजीत सिंह ने अंग्रेजों पर अपनी जीत के उपलक्ष्य में करवाया था।

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