तुलसीदास जी का इतिहास History of Tulsidas ji

By | February 29, 2020

तुलसीदास जी का इतिहास History of Tulsidas ji तुलसीदास  हिन्दी तथा भारतीय साहित्य के महान कवि थे जिन्होने महान कविताओं की रचनाए की। तुलसीदास का जन्म श्रावण मास के सातवें दिन में चमकदार अर्ध चन्द्रमा के समय पर हुआ था। तुलसीदस का जन्म सवंत 1589 मे, राजापुर बाँदा  उत्तर प्रदेश( यूपी ) मे हुआ था तुलसीदस की पिता का नाम आत्माराम दुबे था ओर माता का नाम हुलसी देवी था ओर TulsidasJi का पूरा नाम गोस्वामी तुलसीदास था।

तुलसीदास जी के जन्म की चौथे दिन इनके पिता की मृत्यु हो गई। तुलसीदास Tulsidas Ji बचपन से ही वेद पुराण ओर उपनिषदों का अध्यन करने मे अधिक रुचि रखते थे कई इतिहासकार यह मानते है की तुलसीदास का जन्म 1532 मे हुआ था ओर उन्होने 126 साल तक अपना जीवन बिताया।

तुलसीदास जी का इतिहास History of Tulsidas ji

तुलसीदास जी का इतिहास History of Tulsidas ji tulsidas ka parichay

तुलसीदास जी का नाम रामबोला केसे पड़ा

एसा कहा जाता है की जहा किसी बच्चे का जन्म 9 महीने मे हो जाता है वही तुलसीदास जी अपनी माँ के गर्भ मे 12 महीनो तक रहे थे जब TulsidasJi का जन्म हुआ था तब उनके जन्म के समय उनके 32 दात थे ओर एसा कहा जाता है की वे बचपन से रोने के बजाय राम राम बोला करते थे जिसके कारण TulsidasJi का नाम रामबोला पड़ गया ।

उनके जन्म के समय ज्योतिषियों ने बताया तुलसीदास अशुभ समय में पैदा हुए थे ओर यह भी कहा था कि वे अपने माता-पिता के ऊपर संकट रहेगा जिसके कुछ दिन बाद उनकी माता हुलसी देवी का देहांत हो गया ओर तुलसीदास Tulsidas Ji अब इस दुनिया मे अकेले रह गए इसके बाद तुलसीदास जी का पालन पोषण दसियों द्वारा किया गया ये दासियाँ तुलसीदासजी का पालन पोषण अपने बच्चे की तरह किया वहीं जब तुलसीदास करीब 5 साल के थे तब दासीयों भी संसार छोड़कर चल बसी।

थोड़े वर्षों के बाद Tulsidas का विहाव रत्नावली नाम की कन्या से कर दिया गया रत्नावली एक अति सुंदर कन्या थी विवाह की बाद जब एक बार रत्नावली अपने माई के चली गयी तो TulsidasJi रात के घने अंधेरे मे ओर उफनती नदी को पार कर के ससुराल पाहुच गए ओर सीधे ही रत्नावली के कमरे मे घुस गए जिसे देख उसकी पत्नी चौक गई ओर रत्नावली तुलसीदास जी Tulsidas Ji पर क्रोधित हो गई ओर रत्नावली ने तुलसी दास जी को कड़े शब्द बोले जिसके बाद तुलसीदास जी का जीवन ही बादल गया ।

तुलसीदास जी की प्रारम्भिक शिक्षा

तुलसीदास जी का इतिहास History of Tulsidas ji

Tulsidas – ने वाराणसी में संस्कृत व्याकरण सहित चार वेदों का ज्ञान प्राप्त किया और  6 वेदांग का अध्ययन भी किया वे बचपन से चिंतनशील प्रवृति के थे उनमें सीखने की क्षमता प्रबल थी कहा जाता है की TulsidasJi की करीब 16-17 वर्ष तक ही ही पढ़ाई की पढ़ाई करने के बाद वे राजपुर लॉट आए तुलसीदास को हमेशा वाल्मिकी के अवतरण के रुप में प्रशंसा मिली। TulsidasJi ने अपना पूरा जीवन शुरुआत से अंत तक बनारस में ही व्यतीत किया। 

TulsidasJi ने करीब  1631 में रामनवमी पर अयोध्या में रामचरितमानस को लिखना प्रारम्भ किया था। रामचरितमानस को Tulsidas ने मार्गशीर्ष महीने के विवाह पंचमी (राम-सीता का विवाह) पर वर्ष 1633 में 2 साल, 7 महीने, और 26 दिन का समय लेकर पूरा किया। इसको पूरा करने के बाद तुलसीदास वाराणसी आये और काशी के विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती को महाकाव्य रामचरितमानस सुनाया।

तुलसीदास जी की मृत्यु Tulsidas ji Ki Mrityu Kab Hui

कहा जाता है कि तुलसीदास जी काफी सालों से बीमार थे जिसके कारण गंगा नदी के किनारे अस्सी घाट पर राम नाम शब्द का स्मरण किया ओर अपने प्राण त्याग दिये ओर एसा भी कहा जाता है कि Tulsidas ने अपने मृत्यु से पहले आखिरी कृति विनय-पत्रिका  लिखी थी जिस पर खुद प्रभु राम ने हस्ताक्षर किए थे।

तुलसीदास जी कि रचनाये Tulsidas ki Rachnaye

Tulsidas Poems in Hindi

रामललानहछू,  वैराग्य-संदीपनी,  बरवै रामायण, कलिधर्माधर्म निरुपण, कवित्त रामायण, छप्पय रामायण, कुंडलिया रामायण, रोला रामायण, राम शलाका, कवितावली, दोहावली, रामाज्ञाप्रश्न, गीतावली, विनयपत्रिका, संकट मोचन, छंदावली रामायण, सतसई, जानकी-मंगल, पार्वती-मंगल, श्रीकृष्ण-गीतावली, झूलना ।

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