Padmavati History, रावल रतनसिंह | अलाउद्दीन खिलजी

By | May 17, 2020

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Padmavati History, padmavati history in hindi, रावल रतनसिंह अलाउद्दीन खिलजी, राजस्थान का चित्तोडगढ़ का दुर्ग अलाउद्दीन खिलजी ओर रावल रतनसिंह के युद्ध ओर एतिहासिक द्रष्ठी से व सामरिक द्रष्ठी से अत्यंत महत्वपूर्ण दुर्ग है ये दुर्ग अपनी कलाकृतियों ओर विश्व प्रसिद्ध रानी पद्मावती के कारण हमेशा से ही चर्चा मे रहा है रानी पद्मावती Padmavati History in Hindi गाथा सदा के लिए अमर है।

rani padmawati रानी पद्मावती चित्तौड़ की रानी ओर रावल रतनसिंह की पत्नी थी रानी पद्मावती का पूरा नाम रानी पद्मिनी है। ओर पद्मिनी के पिता का नाम गन्धर्व सेन ओर माता का नाम चम्पावती था।

Padmavati History, रानी पद्मिनी का जन्म सिंगलद्वीप (श्री लंका) मे हुआ था कहा जाता है कि रानी पद्मावती के पास एक बोलने वाला तोता था जिसका नाम हीरामन था ओर रानी पद्मिनी एक सुंदर राजकुमारी थी रानी पद्मिनी की सुंदरता की चर्चा दूर दूर तक थी।

रानी पद्मिनी की पूरी कहानी,राजा रावल रतनसिंहजब रावल रतनसिंह ने हीरामन तोते से पद्मावत की सुंदरता के बारे मे सुना तो पद्मिनी को प्राप्त करने का निश्चय कर लिया किताबों ओर इतिहासकारो का कहना है कि रानी पद्मिनी raani padmavati के पिता ने राजकुमारी के लिए स्वयंवर आयोजित करवाया था।

जिसमे अनेक राजाओ ने भाग लिया ओर रानी पद्मिनी Padmavati History का विवाह के लिए हाथ मांगा इस स्वयंवर आयोजन मे चित्तौड़ के राजा रावल रतनसिंह ने भी भाग लिया ओर ओर रानी पद्मिनी का हाथ मांगा रावल रतनसिंह के पहले ही 13 रानिया थी ओर रानी पद्मिनी से विवाह कर के चित्तौड़गढ़ आ गए।

रावल रतनसिंह जो कि चित्तौड़ का शासक था ओर एक वीर राजपूत था ओर वे अपनी रानी पद्मिनी से अधिक प्रेम करते थे रावल रतनसिंह ने रानी पद्मिनी के बाद विवाह नहीं किया रावल रतनसिंह को कला मे भी अधिक रुचि थी

राघव चेतन का बहिष्कार

रावल रतनसिंह के राज्य मे एक अच्छा गायक भी था जिसका नाम राघव चेतन था राघव चेतन राजा के सेवा मे रहता था।

यह एक गायक होने के साथ काला जादू भी जानता था लेकिन इसकी खबर किसी को भी नहीं थी जब यह बात चित्तौड़ के राजा रावल रतनसिंह को पता चली तो रावल रतनसिंह ने राघव चेतन का बहिष्कार कर दिया ओर राज्य से बाहर निकाल दिया।

राघव चेतन इस अपमान से क्रोधित हो गए ओर इस अपमान का बदला लेने के लिए वह सुल्तान ( अलाउद्दीन खिलजी ) के पास दिल्ली चला गया।

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राघव चेतन दिल्ली जाकर अलाउद्दीन खिलजी को रानी Padmavati History पद्मिनी के सुंदरता के विषय मे बताया ओर रानी पद्मिनी के सुंदरता के बारे मे जानकारी मिलते ही सुल्तान ने उसे प्राप्त करने की ठान ली बस क्या था अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर आक्रमण कर दिया ओर दुर्ग पर 8 वर्ष तक घेरा डाला रखा।

ओर विजय की कोई आशा नजर नहीं आई बस क्या था अलाउद्दीन खिलजी ने कूटनीति का सहारा लिया ओर खिलजी ने राणाजी को कहलाया भेजा की रानी पद्मिनी का रूप दर्पण मे ही करवा दिया जाए रावल रतनसिंह ने यह मांग स्वीकार कर ली।

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परंतु दुर्ग से जब अलाउद्दीन खिलजी वापस लोट रहे थे तब खिलजी ने रावल रतनसिंह को बंदी बना लिया ओर दिल्ली ले गया अलाउद्दीन खिलजी ने रावल रतनसिंह को लोटाने के बदले  रानी पद्मिनी को दिल्ली शाही दरबार मे उपस्थित होने की मांग की।

ओर बाद मे रानी पद्मिनी padmavati history in hindi ने ओर गोरा व बादल रावल रतनसिंह को छुड़ाने की योजना बनाई कि करीब 1500 सैनिको को रानी पद्मिनी कि सहेलिया के भेष मे डोलियो मे सुल्तान के पास ले गए ओर कहलवा भेजा कि रानी पद्मिनी राजा रावल रतनसिंह से मिलकर ही सुल्तान कि सेवा मे हाजिर होगी

खिलजी ने इसकी स्वीकृति दे दी ओर इसके बाद राजपूत सैनिको ने रावल रतनसिंह को छुड़ाकर चित्तौड़ भेज दिये ओर बाद मे अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर आक्रमण कर दिया इस युद्ध मे हजारों वीर राजपूत लड़ते लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गए रानी पद्मिनी भी अपनी सैकड़ों सहेलियों के साथ जौहर के कुंड मे कूद पड़ी ओर संसार से विदा हो गई।

Padmavati History रानी पद्मिनी ने अपने पति धर्म को बखूबी निभाया ओर इस प्रकार सुल्तान का चित्तौड़गढ़ पर अधिकार हो गया लेकिन रानी सुंदर पद्मिनी को देख न सका ओर न ही प्राप्त कर सका सुल्तान की यह इच्छा अधूरी ही रह गई।

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