राजस्थान मे लोक देवता – Rajasthan Ke Lok Devta Pdf Download

By | June 5, 2020

राजस्थान मे लोक देवता – Rajasthan Ke Lok Devta Pdf Download

Rajasthan Ke Lok Devta Ka Naam – Rajasthan Ke Lok Devta List

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पाबूजी

राजस्थान मे लोक देवता – Rajasthan Ke Lok Devta Pdf Download, पाबूजी जो कि एक प्रसिद्ध लोक देवता (Lok Devta)है  राठौड़ राजवंश के पाबूजी का जन्म 13 वी शताब्दी मे फलौदी (जोधपुर) के निकट कोलूमण्ड मे धाँधल एवं कमलादे के घर हुआ ये राठौड़ के मूल पुरुष राव सीहा के वंशज थे।

इनका विवाह अमरकंट के राजा सूरज मल सोढा की पुत्री सुप्यारदे से हो रहा था कि ये फेरे कि बीच ही उठकर अपने बहनोई जिन्दराव खींची से देवल चारणी कि गायें छुड़ाने चले गए ओर देचू ग्राम मे युद्ध मे वीर गति को प्राप्त हुये ओर इन्हे गो रक्षक देवता के रूप मे भी पूजा जाता है ।

प्लेग रक्षकों ओर उटों के देवता के रूप मे पाबूजी कि विशेष मान्यता है कहा जाता है कि मारवाड़ मे सबसे पहले उट(सांडे) लाने का श्रेय पाबूजी को ही है । उटों कि पालक राइका ( रेबारी ) जाती इन्हे अपना आरध्ये देव मानती है ये थोरी ओर भील जाती मे अति लोकप्रिय है ओर मेहर जाती के मुसलमान इन्हे पीर मानकर पूजा करते है पाबूजी को लक्ष्मण का अवतार भी माना जाता है पाबू केसर कालमी घोड़ी ओर बायी ओर झुकी पग के लिए प्रसिद्ध है। 

इनका बोध चिन्ह भला है कोलूमंड मे इनका सबसे प्रसिद्द मंदिर है जहां हर वर्ष चैत्र अमावश्य को मेला भरता है! पाबूजी से संबंध गाथा गीत पाबूजी के पवाड़े माठ वाद्य के साठा नायक ओर रेबारी जाती द्वारे गाये जाते है पाबूजी के पड़ नायक जाति के भोंपों द्वारा रावण हत्या वाद्य के साठा बाजी जाती है चांदा डेमा ओर हरमल पाबूजी के रक्षक सहयोगी के रूप मे जाने जाते है। आशिया मोड जी द्वारा लिखित पबु प्रकाश पाबू जी के जीवन पर एक महत्वपूर्ण रचना है ।

गोगाजी ( गोगापीर ) Gogaji History in Hindi

चौहान वंशीय गोगाजी का जन्म 11वी सदी मे चुरू जिले के ददरेवा नमक स्थान पर जेवरसिंह बाचल के घर हुआ ददरेवा मे इनका स्थान को शीर्ष मेडी कहते है। जहा हर वर्ष गोगाजी का मेला भरता है गोगाजी न, गो रक्षार्थ एवं मुस्लिम आक्रांताओं से देश कि रक्षार्थ अपने प्राण न्योछावर कर दिये ईसलिए इन्हे लोक देवता के रूप मे पूजा जाने लगा इन्हे जाहरपीर या गुग्गा के नाम से भी पूजा जाता है।

इन्हे सांपों का देवता भी माना जाता है राजस्थान का किसान वर्षा के बाद हल जोतने से पहले गोगाजी के नाम कि राखी गोगा राखड़ी हल ओर हाली दोनो के बांधता है गोगाजी के थान खेजड़ी वृक्ष के नीचे होते है। जहा मूर्ति स्वरूप  एक पत्थर पर सर्प के आकृति अंकित होती है।

गोगाजी के जन्म स्थल ददरेवा को शीर्ष मेडी ओर समाधि स्थल गोगा मेडी को धूर मेडी भी कहते है गोगामेड़ी मे प्रतिवर्ष भाद्र कृष्ण नवमी (गोगा नवमी) को विशाल भरता है गोगाजी का मंदिर सांचोर कि सवारी किलौरियों कि ढाणी मे भी गोगाजी कि ओल्डी नामक स्थान पर गोगाजी का मंदिर है गोगाजी कि सवारी नीली घोड़ी थी इन्हे गोगा बाप्पाके नाम से भी पुकारते है।

गोगाजी कि पूजा भला के लिए योद्धा के रूप मे होती है भला लिए घुड़सवार गोगाजी ओर साथ मे प्रतीक सर्प इनको खीर ओर लापसी तथा चूरमा का भोग लगता है।

रामदेवजी (Ramdev ji History in Hindi)

Rajasthan Ke Lok Devta Pdf Download सम्पूर्ण राजस्थान गुजरात मध्यप्रदेश उत्तरप्रदेश आदि राज्यो मे रामसा पीर रुणीचा र धणी व बाबा रामदेव नाम से प्रसिद्द है लोक देवता रामदेवजी का जन्म तंवर वंशीय ठाकुर अजमाल जी के यहा हुआ इनकी माता का नाम मैणादे था।

ये अर्जुन के वंश माने जाते है रामदेवजी का जन्म भाद्र पद शुक्ला दितीया स 1462 ( सन 1405 ) को बाड़मेर की शिव तहसील के उंडु कासमेर ग्राम मे हुआ था भाद्र पद सुदी एकादशी स 1515 ( सन 1458 ) को इन्होने रुणीचा के राम सरोवर के किनारे जीवित समाधि ली थी।

रामदेवजी ने समाज मे व्याप्त छुआ छूट उच नीच आदि बुराईओ को दूर कर सामाजिक समाज स्थापित की थी।

अत सभी जातियो एवं लाभी समुदायों के लोग इनको पूजते है ये अपनी वीरता ओर समाज सुधार के कारण पूज्य हुए इन्होने बाल्यवस्था मे ही पोकरण इलाके के क्रूर व्यक्ति भैरवा राक्षस की अजारकता समाप्त कर अपनी वीरता का परिचय दिया हिन्दू इन्हे कृष्ण का अवतार मानकर तथा मुसलमान रामसा पीर के रूप मे इनकी पूजा करते है कामड़िया पंथ रामदेवजी से प्रारम्भ हुआ माना जाता है इनके गुरु का नाम बालीनाथ था।

एसी मान्यता है की रामदेवजी ने भैरव राक्षस का वध कर जनता को कष्ट से मुक्ति दिलाई पोकरण के कस्बे को पूर्ण बसाया तथा रुणीचा मे रामदेवजी का निर्माण करवाया रामदेवरा ( रुणीचा ) मे रामदेवजी का विशाल मंदिर है।

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जहा हर वर्ष भाद्र पद शुक्ला दितीया से एकादशी तक विशाल मेला भरता है जिसकी मुख्य विशेषता सांप्रदायिक सदभाव है क्योंकि यहा हिन्दू मुस्लिम एवं अन्य धर्मो के लोग बड़ी मात्रा मे आते है इस मेले का दूसरा आकर्षण रामदेवजी की भक्ति मे कामड़ जाति की स्त्रियो द्वारा किया जाने वाला तेरहताली नृत्य है इनके अन्य मंदिर जोधपुर के पश्चिम मे मसूरिया पहाड़ी पर बिराटिया एवं सुरताखेड़ा मे भी है।

रामदेवजी के प्रतीक चिन्ह के रूप मे खुले चबूतरे पर ताख बनाकर उसमे संगमरमर या पीले पत्थर के इनके पगल्ये या चरण चिन्ह बनाकर ग्राम ग्राम मे पूजे जाते है रामदेवजी के भक्त इन्हे कपड़े का बना घोडा चड़ाते है।

रामदेवजी का घोडा लीला था रामदेवजी के मंदिरो को देवरा कहा जाता है जिन पर स्वेत या 5 रंगो की ध्वजा नेज़ा फहराई जाती है रामदेवजी एक मात्र एसे देवता है जो एक कवि भी थे इनकी रचित चौबीस बाणीया प्रसिद्द है डाली बाई रामदेवजी के अनन्य भक्त थी जिन्होने मदेवजी से एक दिन पूर्व उनके पास ही जीवीत सामधि ले ली थी ओर वही डाली बाई का मंदिर भी है। ओर रामडेवजी भी लोक देवता (Lok Devta) के रूप मे पूजे जाते है ।

( तेजाजी ) Tejaji Maharaj Ka Itihas

लोक देवता Lok Devta तेजाजी खंडनाल नागौर के नागवंशीय जाट थे इन्होने लाछा गुजरी की गाये मेरों से छुड़ाने हेतु अपने प्राणोत्सर्ग किए इनके थान पर सर्प व कुत्ते काटे प्राणी का इलाज होता है।

हर किसान तेजाजी की गीत साथ ही बुवाई प्रारम्भ करता है एसा विश्वास है की इस स्मरण ले भावी फसल अच्छी होगी तेजाजी विशेषत अजमेर जिले के लोक देवता है Lok Devta । इनके मुख्य थान अजमेर जिले के सुरसुरा ब्यावर सेंदरिया एवं भवता मे है उनके जन्म स्थान खड्नाल मे भी इनका मंदिर है ।

नागौर जिले के परबतसर कस्बे मे तेजाजी का विशाल मेला शुक्ला दशमी को भरता है जहा भारी मात्रा मे पशुओ की भी खरीद फ़रोखा होती है। तेजाजी की निर्वाण स्थली सुरसुरा ( अजमेर ) मे तेजाजी की नगीर्ण निकाली जाति है सर्प दंश का इलाज करने वाले तेजाजी के भोंपे घोडला कहते है तेजाजी की घोड़ी लीलन ( सिणगारी ) थी।

देवनारायण

देवनारायण का जन्म 1300 मे बगड़ावत परिवार मे हुआ था वे सवाइभोज ओर सेडु के पुत्र थे इनका जन्म नाम उदयसिंह था देवनारायण का घोडा लीलागर था इनकी पत्नी धार नरेश जयसिंह की पुत्री पिपलदे थी।

इन्होने अपने पिता की हत्या का बदला लिया ओर अपने पराक्रम ओर सिद्धिया का प्रयोग अन्याय का प्रतीकार करने ओर जनकल्याण मे किया देवमाली ब्यावर मे इन्होने देह त्यागी देवजी का मूल देवरा आसिंद से 14 मील दूर गोथा दड़ावत मे है इनकी अन्य प्रमुख देवरे देवमाली ब्यावर , अजमेर देवधाम जोधपुरिया व देव डूंगरी पहाड़ी मे है देवनारायण के देवरो मे उनकी प्रतिमा के स्थान पर बड़ी ईटों की पुजा की जाती है। गुर्जर जाती के लोग देवनारायण जी को विष्णु का अवतार मानते है देवनारायण जी की पद गुर्जर भोपो द्वारा बाची जाती है यह सबसे बड़ी पड़ है देवनारायण जी का मेला भाद्र शुक्ला छठ व सप्तमी को लगता है।

हड़बू जी

हड़बू जी भूंडोल नागौर के राजा मेहाजी सांखला के पुत्र थे व मारवाड़ के राव जोधा के समकालीन थे लोकदेवता रामदेव जी हड़बू जी के मौसेरे भाई थे, जिनके प्रेरणा से हड़बू जी ने योगी बालीनाथ से दीक्षा ली तथा बाबा रामदेव के समाज सुधार के लक्ष्य के लिए उन्होने आजीवन पूर्ण निष्ठा से कार्य किया बेंगटी ( फलौदी  ) हड़बू का मुख्य पूजा स्थल है एवं इनके पुजारी सांखला राजपूत होते है श्रद्धालुओं द्वारा मनाई गई मनौती यह कार्य सिद्ध होने पर ग्राम बेंगटी मे स्थापित मंदिर मे हड़बू की गाड़ी पुजा की जाती है इस गाड़ी मे हड़बू पंगु गायों के लिए घास भरकर दूर दूर ले जाते थे।

मेहाजी मांगलिया

राजस्थान मे लोक देवता – Rajasthan Ke Lok Devta Pdf Download मेहाजी सभी मांगलियों के इष्ट देव के रूप मे पूजे जाते है मेहाजी का सारा जीवन धर्म की रक्षा ओर मर्यादाओं के पालन मे बिता जैसलमर के राव राणगदेव भाटी से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुये बापणी मे इनका मंदिर है भाद्र पद मे कृष्ण जन्माष्टमी को मांगलिया राजपूत मेहाजी की अष्टमी मनाते है लोक मान्य है की इनकी पूजा करने वाले भोपा की वंश वृद्धि नहीं होती वे गोद लेकर पीड़ी आगे चलाते है किरड़ काबरा घोडा मेहाजी का प्रिय घोडा था।

कल्ला जी

वीर कल्ला राठोड का जन्म मारवाड़ के सामियाना ग्राम मे राव अचलाजी के घर हुआ इन्हे कई सिद्धिया प्राप्त थी प्रसिद्ध होगी भैरव नाथ इनके गुरु थे चित्तौड़ के तीसरे शाके मे अकबर के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए युद्धभूमि मे चतुर्भुज के रूप मे दिखाई गई वीरता के कारण इनकी ख्याति चार हाथ वाले लोक देवता Lok Devta के रूप मे हुई चित्तौड़गड मे कल्लाजी राठोड की भैरव पोल पर एक छतरी बनी हुई है रनेला इस वीर का सिद्ध पीठ है भूत –पिशाच ग्रस्त लोग रोगी पशु पागल कुत्ता गोयरा सर्प होली के जंतुओं से दंशित व्यक्ति या पशु सभी कल्ला जी की कृपा से संताप से छुटकारा पाते है।

देव बाबा

पशु चिकित्सा का अच्छा ज्ञान होने के कारण देव बाबा गूजरों व ग्वालों के पालनहार एवं कष्ट निवारक के रूप मे पूजनीय हो गए भरतपुर के नगला जहाज ग्राम मे देव बाबा का मंदिर है जहा हर वर्ष भाद्र पद शुक्ला पंचमी तथा चेत्र शुक्ला पंचमी को वर्ष मे दो बार मेला भरता है।

मामादेव

राजस्थान के लोक देवता Lok Devta मे मामा देव एक एसे विशिष्ट लोकदेवता है जिनकी मिट्टी पर पत्थर की पूर्तियाँ नहीं होती बल्कि लकड़ी का एक विशिष्ट व कलात्मक तोरण होता है जो ग्राम की बाहर की मुख्य सड़क प्रतिष्ठित किया जाता है ये मुख्यत ग्राम के रक्षक ओर बरसात के देव है इन्हे पसंद करने हेतु भैस की बाली दी जाती है।

तल्ली नाथ जी

तल्लीनाथ जी जालौर जिले के अत्यंत प्रसिद्ध लोक देवता Lok Devta है इनका वास्तविक नाम गांगदेव राठोड तथा पिता का नाम वीरमदेव था ये शेरगढ़ (जोधपुर ) ठिकाने के शासक थे इनके गुरु जालन्धर नाथ थे ग्राम मे किसी व्यक्ति या पशु को बीमार पड़ने या जहरीला कीड़ा काटने पर इनके नाम का डोरा बांधते है जालौर के पांचोटा ग्राम के निकट पंचमुखी पहाड़ी के बीच घोड़े पर सवार बाबा तल्लीनाथ की मूर्ति स्थापित है जालौर क्षेत्र के लोग इसके आसपास के क्षेत्र को ओरण मानते है एवं कोई पेड़ पोधा नहीं काटते है।

वीर बग्गाजी

लोकदेवता बग्गाजी का जन्म बीकानेर के रीडी ग्राम के एक जाट कृषक राव महन के घर हुआ था इनकी माता का नाम सुल्तानी था इन्होने सारा जीवन गौ सेवा मे व्यतित किया ओर अंत मे मुस्लिम लुटेरों से गायों की रक्षा करते हाये अपने प्राण न्योछावर कर दिये जाखड़ समाज मे इन्हे कुलदेवता के रूप मे पूजता है।

भूरिया बाबा (गौतमेश्वर) – दक्षिणी राजस्थान के गौड़वाड क्षेत्र की मीणा आदिवासियो के इष्टदेव गौतमेश्वर महादेव ( भूरिया बाबा ) का प्रसिद्ध मंदिर वहा की अरावली पर्वत श्रंखलाओ मे पाली जिले मे स्थित है।

वीर फत्ता जी – वर्तमान जालौर जिले के सांथु ग्राम मे जन्मे वीर फत्ता जी ने लुटेरों से ग्राम की रक्ष करते हुये अपने प्राणो की बाली दी ओर हमेशा के लिए लोकदेवता के रूप मे अमर हो गए सांथु ग्राम मे इनका विशाल मंदिर है जहा भाद्र पद शुक्ला नवमी को मेला भरता है।

बाबा झुझार जी – स्वतन्त्रता से पूर्व सीकर क्षेत्र के इमलोहा ग्राम मे राजपूत परिवार मे जन्मे झुझार जी ने पाने भाइयो के साथ मिलकर मुस्लिम लुटेरों से ग्राम की रक्षा करते हुये अपने प्राण गवा दिये तभी से इन्हे लोक मानस द्वारा लोकदेवता के रूप मे पूजा जाता है हर वर्ष रामनवमी को इनकी याद मे ग्राम मे मेला लगता है।

वीर पनराज जी – 16 वी शदी मे जैसलमर के नगा ग्राम के क्षेत्रीय परिवार मे पैदा हुये पनराज जी ने पास के काठौड़ी ग्राम के ब्राह्मण परिवार की गायों को मुस्लिम लुटेरों से बचते हुये अपने प्राण न्योछावर कर दिये ओर लोकदेवता के रूप अमर हो गए इनकी याद मे पनराजसर ग्राम मे वर्ष मे दो बार मेला भरता है।

हरीरामजी बाबा – ये सर्प दंश का इलाज करते है सुजानगढ़ नागौर मार्ग पर झोरडा ग्राम मे इनका मंदिर है मंदिर मे साँप की बंबी एवं बाबा के प्रतीक के रूप मे चरण कमल है यहा हर वर्ष मेला भरता है।

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