राजस्थान इतिहास की जानकारी । History of Rajasthan in Hindi

By | May 21, 2020

राजस्थान इतिहास की जानकारी । History of Rajasthan in Hindi, छठी शताब्दी मैं इस भू-भाग में अपनी वीरता एवं बलिदान के लिए इतिहास में प्रसिद्ध राजपूती राज्यों का उदय हुआ जो धीरे-धीरे इसके संपूर्ण क्षेत्र में अलग-अलग रियासतों के रूप में विस्तृत हो गए ।

यह रियासतें विभिन्न राजपूत शासकों के नियंत्रण में थी जिनमें मेवाड़ के गुहिल, मारवाड़ के राठौड़, ढुढाड़ के कच्छवाहा, अजमेर के चौहान आदि प्रसिद्ध राजपूत वंश थे। जिनकी कीर्ति आज भी संपूर्ण विश्व में फैली हुई है।

राजपूत राज्यों की प्रधानता के कारण ही कालांतर में इस संपूर्ण भू-भाग को राजपूताना कहा जाने लगा राजधानी भू-भाग के लिए राजपूताना शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1800 में जॉर्ज थामस द्वारा किया गया था।

राजस्थान इतिहास की जानकारी । History of Rajasthan in Hindi

राजस्थान इतिहास की जानकारी । History of Rajasthan in Hindi

राजस्थान प्रदेश जो कि भारत देश के उत्तर पश्चिमी भाग में स्थित है राजस्थान की सभ्यता और संस्कृति जो कि बिल्कुल सिंधु घाटी सभ्यता के समान थी।

इस मरू प्रधान प्रदेश राजस्थान को समय-समय पर अनेक नामों से पुकारा जाता रहा है महर्षि वाल्मीकी ने इस भू-भाग के लिए “ मरुकान्तार ” शब्द का प्रयोग किया राजस्थान शब्द का प्राचीनतम प्रयोग वसंतगढ ( सिरोही ) के शिलालेख में “ राजस्थानीयादित्य ” के रूप में हुआ इसके बाद मुहणोंत नैणसी री ख्यात एवं राजरूपक नामक ग्रंथों में भी राजस्थान शब्द का प्रयोग हुआ।

कर्नल जेम्स टॉड ने इस प्रदेश को रायथान क्यों कहा

कर्नल जेम्स टॉड ने इस प्रदेश को रायथान कहा क्योंकि यहा स्थानीय बोलचाल एवं लौकिक साहित्य में राजाओं के निवास के प्रांत को राजस्थान कहते थे, ब्रिटिश काल में यहां प्रांत राजपूताना या रजवाड़ा के नाम से पुकारा जाता था।

इस भौगोलिक भू-भाग के लिए राजस्थान शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग कर्नल जेम्स टॉड ने राजस्थान के इतिहास पर 1838 में लंदन में प्रकाशित अपनी प्रसिद्ध ऐतिहासिक पुस्तक में किया था।

वैसे तो कर्नल जेम्स टॉड को राजस्थान के इतिहास का जनक भी कहा जाता है 19वीं शताब्दी में सर्वप्रथम कर्नल टॉड ने सारे राजस्थान इतिहास की रचना कर इतिहास लेखन को एक नई दिशा प्रदान की।

स्वतंत्रता के समय राजस्थान कहीं छोटे-छोटे भागों में बटा हुआ था राजस्थान प्राचीन काल से ही भारत के गौरवपूर्ण इतिहास के सृजन में सहयोगी रहा है।  

यह रियासतें विभिन्न राजवंशी है राजपूत जाट और मुस्लिम शासकों द्वारा शासित होती थी इन सभी रियासतों का अलग-अलग इतिहास था और यह इतिहास सामान्य उस राज्य के संस्थापक तथा उसके घराने से प्रारंभ होता था और उसमें राजनीतिक घटनाओं तथा युद्ध के विवरण को ही अधिक महत्व दिया जाता था।

इस राजस्थान प्रदेश को बाद में धीरे-धीरे कर के सारी रियासतों को मिलाकर संपूर्ण राजस्थान का निर्माण किया गया। राजस्थान प्रदेश अपने वर्तमान स्वरूप में 1 नवंबर 1956 को आया।

राजस्थान का एकीकरण सात चरणो मे हुआ

  1. 18 मार्च, 1948 को अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली रियासतों का विलय होकर ‘मत्स्य संघ’ बना। धौलपुर के तत्कालीन महाराजा उदयसिंह राजप्रमुख व अलवर राजधानी बनी।
  2. 25 मार्च, 1948 को कोटा, बूंदी, झालावाड़, टोंक, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, किशनगढ़ व शाहपुरा का विलय होकर राजस्थान संघ बना।
  3. 18 अप्रेल, 1948 को उदयपुर रियासत को भी राजस्थान मे विलय कर लिया गया। और इसका नया नाम ‘संयुक्त राजस्थान संघ’ रखा गया। उदयपुर के तत्कालीन महाराणा भूपाल सिंह राजप्रमुख बने।
  4. 30 मार्च, 1949 में जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों का विलय होकर ‘वृहत्तर राजस्थान संघ’ बना था। यही राजस्थान की स्थापना का दिन माना जाता है।
  5. 15 अप्रॅल, 1949 को ‘मत्स्य संघ’ का वृहत्तर राजस्थान संघ में विलय हो गया।
  6. 26 जनवरी, 1950 को सिरोही रियासत को भी वृहत्तर राजस्थान संघ में मिलाया गया।
  7. 1 नवंबर, 1956 को आबू, देलवाड़ा तहसील का भी राजस्थान में विलय हुआ,

इस प्रकार सम्पूर्ण छोटी-बड़ी रियासते को राजस्थान मे विलय कर  लिया गया इस प्रकार एक बढ़ा राज्य, राजस्थान का निर्माण हुआ। और इसको राजस्थान इतिहास मे लिख दिया गया ।

राजस्थान का क्षेत्रफल कितना बड़ा है

राजस्थान की इस जन्म भूमि के लिए प्राण न्योछावर कर देने वाले वीरो तथा वीरांगनाओं की भूमि राजस्थान भारत के उत्तर-पश्चिम में स्थित है तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान भारत देश का सबसे बड़ा राज्य (1 नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद)  है।

इसका क्षेत्रफल 342 239 वर्ग किमी ( 132 140 वर्ग मील है) जो भारत के कुल क्षेत्रफल का 10 .41 प्रतिशत है.।

राजस्थान पूर्व में गंगा यमुना नदियों के वृतह मैदान, दक्षिण में मालवा पठार तथा उत्तर व उत्तर पश्चिम में सतलज व्यास नदी के मैदान द्वारा तथा पश्चिम में पाकिस्तान से घिरा हुआ है।

राजस्थान का अक्षांश और देशांतर विस्तार

राजस्थान प्रदेश 2303 उतरी अक्षांश से 30012 उतरी अक्षांश ( अक्षांशीय विस्तार 709 ) तथा 69030 पूर्वी देशान्तर से 78017 पूर्वी देशान्तर ( देशांतरीय विस्तार 8047 ) के मध्य स्थित है । राजस्थान का अधिकांश भाग कर्क रेखा (231/2 या 23030 उतरी अक्षांश रेखा ) के ऊपर स्थित है ।

उतर से दक्षिण तक राजस्थान की लंबाई 826 किलोमीटर व विस्तार उत्तर मे कोणा गाव (गंगानगर) से दक्षिण मे बोरकुंड गाव ( कुशलगढ़, बासवाड़ा ) तक है।

पूर्व से पश्चिम तक राज्य की चौड़ाई 869 किलोमीटर तथा विस्तार पश्चिम मे कटारा गाव (जैसलमेर) से पूर्व मे सिलावट गाव ( राजाखेड़ा धोलपुर ) तक है।

राजस्थान का थार का मरुस्थल ( थार का रेगिस्तान )

राजस्थान मे स्थित थार मरुस्थल जिसे भारत का महान मरुस्थल भी कहा जात है और यह मरुस्थल दुनिया का 9वा सबसे बड़ा गरम मरुस्थल है । राजस्थान इतिहास मे थार मरस्थल एक महत्वपूर्ण कड़ी है जो दुनिया मे सर्वाधिक स्थान रखती है।

राजस्थान इतिहास मे थार मरुस्थल जो की 2 लाख 80 हजार वर्गकोलोमीटर तक के क्षेत्र मे फेला है । इस थार मरुस्थल का 85 प्रतिशत भाग भारत और पाकिस्तान मे है ।

भारत सरकार ने थार रेगिस्तान के फैलाव को रोकने के लिए इंद्रा नहर बनवाई जिसकी लंबाई 649 किलोमीटर थी।

राजस्थान इतिहास मे दुर्गों के बारे में जानकारी

राजस्थान के इतिहास मे स्थापत्य कला मे सबसे अधिक श्रेय राणा कुंभा को जाता है। और राजस्थान के इतिहास मे स्थापति का जनक राणा कुंभा को कहा जाता है ।

राजस्थान मे राजाओं ने अपने राज्य का विस्तार किया और राजस्थान मे बड़े बड़े दुर्गो का निर्माण करवा कर यहा की स्थापत्य कला को बढावा दिया। राजस्थान के इन राजाओ ने अपने राज्य की रक्षा और सीमाओ को बढ़ाने के लिया अनेक दुर्गो का निर्माण करवाया गया ।   

  1. गिरि दुर्ग – ये पर्वत एकांत में किसी पहाडी पर स्थित होता है तथा इसमे जल संचय का अच्छा प्रबंध होता है । उदाहरण – कुम्भलगढ़, मांडलगढ़ (भीलवाडा), तारागढ़ (अजमेर), जयगढ़, नाहरगढ़ (जयपुर) , अचलगढ (सिरोही), मेहरानगढ (जोधपुर) ।
  2. सैन्य दूर्ग – जो व्यूह रचना में चतुर वीरों से व्याप्त होने से अभेद्य हो ये दुर्ग सर्वश्रेष्ठ समझे जाते है।
  3. सहाय दुर्ग – जिसमें वीर और सदा साथ देने वाले बंधुजन रहते हो ।
  4. एरन दुर्ग – यह दुर्ग खाई, काँटों तथा कठोर पत्थरों से निर्मित होता हैं । उदाहरण – रणथम्भीर दुर्ग, चित्तौड़ दुर्ग ।
  5. धान्वन (मरूस्थल) दुर्ग – ये दुर्ग चारों ओर रेत के ऊँचे टीलों से घिरे होते है। उदाहरण – जैसलमेर, बीकानेर व नागौर के दुर्ग ।
  6. वन दुर्ग- जो चारों और वनों से ढका हुआ हो और कांटेदार वृक्ष हो । जैसे सिवाना दुर्ग, त्रिभुवनगढ़ दुर्ग रणथम्भौर दुर्ग ।
  7. पारिख दुर्ग-वे दुर्ग जिनके चारों और बहुत बडी खाई हो । जैसे लोहागढ़ दुर्ग, भरतपुर ।
  8. पारिध दुर्ग- जिसके चारों ओर ईट, पत्थर तथा मिट्टी से बनी बडी-बडी दीवारों का सुदृढ परकोटा हो जैसे – चित्तोड़गढ़, कुम्भलगढ़ दुर्ग।
  9. औदक दुर्ग (जल दुर्ग) – ये दुर्ग चारों ओर पानी से घिरे होते है । उदाहरण – गागरोण (झालावाड), भैंसरोड़गढ़ दुर्ग (चित्तोंड़गढ़) ।

राजस्थान के प्रमुख दुर्गो के नाम

आमेर दुर्ग (जयपुर), कुंभलगढ़ दुर्ग, गागरोन का किला (झालावाड), जयगढ़ का किला, चित्तौड़गढ़ का दुर्ग, जालौर का दुर्ग, बीकानेर का जूनागढ़ का दुर्ग, सोनार का किला (जैसलमर), तारागढ़ (बूंदी) , तारागढ़ (अजमेर), मेहरानगढ़ का दुर्ग, नाहरगढ़ का किला (जयपुर), लोहागढ़ (भरतपुर), जयगढ़ का किला (जयपुर),

राजस्थान का हृदय किसे कहते हैं

राजस्थान के इतिहास मे राजस्थान का हृदय अजमेर शहर को कहा जाता है, अजमेर शहर भारत के प्राचीन नगरों मे से एक है अजमेर शहर की स्थापना सन 1113 मे चौहान राजा अजयराज ने की थी।

1192 ई. में मौहम्मद ग़ौरी ने भारत पर आक्रमण किया, तब उस समय अजमेर पृथ्वीराज के राज्य का एक बड़ा नगर था।

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