महाराणा कुंभा का इतिहास । महाराणा कुंभा की सांस्कृतिक उपलब्धियां

By | May 20, 2020

महाराणा कुंभा एक महान सम्राट, ओर एक महान सेनानायक

महाराणा कुंभा एक वीर योद्धा ओर कुशल सेनानायक था जिसने अनेक विजय प्राप्त कि ओर अपने राज्यो कि सीमा का विस्तार किया।

दिल्ली सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु के बाद दिल्ली सुलतानो की शक्ति कमजोर हो गई इस शक्ति का कमजोरी का लाभ उठाते हुये सीसोदा के सामन्त हम्मीर ने करीब 1326 मे चित्तौड़ पर अधिकार कर लिए ओर एक मजबूत शासन की स्थापना की हम्मीर एक वीर योद्धा था ओर महत्वकाँसी व्यक्ति था।

हम्मीर की मृत्यु के बाद क्षेत्रसिंह मेवाड़ की गद्दी पर बेठा महाराजा क्षेत्रसिंह ने भी मेवाड़ की सीमाओ का विस्तार किया ओर धर्म कला साहित्य के क्षेत्र मे भी काफी उन्नति की।

क्षेत्रसिंह की मृत्यु के बाद लक्षसिंह और महराणा मोकल भी पतापी नरेश हुये इन्होने भी मेवाड़ की शक्ति मे वृद्धि की करीब 1433 मे महाराणा मोकल की मृत्यु के बाद महाराणा कुंभा मेवाड़ की गद्दी पर बेठा महारणा कुंभा एक वीर योद्धा था ।

महाराणा कुंभा की प्रारम्भिक कठिनाई ओर उनका दमन

राणा कुंभा के प्रपितामाह क्षेत्रसिंह की उपपत्नी के पुत्र चाचा व मेरा जो की महाराणा कुंभा के शत्रु बने हुये थे और इन चाचा व मेरा ने ही महाराणा मोकल की हत्या की थी इस अपराध मे महपा पांवर नामक विद्रोही भी शामिल था ये विद्रोही बड़े चतुर थे इन्होने भीलों को भी अपनी ओर मिला लिया ओर कुंभा पर आक्रमण करने की योजना बनाई विपरीत मे महाराणा कुंभा ने भी एक सेना भेजी ओर दोनों के बीच मे युद्ध हुआ जिसमे चाचा व मेरा ओर अनेक विद्रोही मारे गए इस प्रकार महाराणा कुंभा ने विद्रोही की स्थिति को समाप्त कर दिया ।

राणा के प्रारम्भ मे दूसरे कठिनाई थी कि महाराणा कुंभा के पितामह लक्षसिंह ने वृद्दावस्था मे ही रणमल राठोड कि बहिन से विवाह कर लिया ओर एक समस्या उत्पन्न कर दी ओर लक्षसिंह ने इस विवाह कि लिए यह शर्त रखी थी कि हंसाबाई की संतान ही मेवाड़ का शासक बनेगा या फिर मेवाड़ की गद्दी पर बेठेगा ओर शासन चलाएगा बस क्या था हंसाबाई का पुत्र मोकल मेवाड़ की गद्दी पर बेठा ओर लक्षसिंह के बड़े पुत्र चुन्डा ने उसकी भक्ति या सेवा करनी आरंभ कर दी लेकिन हंसाबाई, चुन्डा पर संदेह करती थी ओर चुन्डा का अपमान करके बाहर निकाल दिया।

maharana kumbha,राजस्थान का इतिहस,महाराणा कुंभा की विजय,महाराणा कुंभा का जीवन ओर चुन्डा मेवाड़ छोड़कर मांडू भाग गया इधर मेवाड़ की सारी शक्ति हंसा बाई के भाई रणमाल के हाथो मे आ गई राणा कुंभा को चिंता हुई ओर रणमल के प्रभाव को नष्ट करने का निश्चय कर लिया इसी बीच राणा कुंभा ने चुन्डा को मांडू से बुला लिया गया ओर 1483 मे रण मल को मोत के घाट उतार दिया तो इस प्रकार राणा कुंभा के अपनी कुशलता का परिचय दिया ओर अपनी सूझ बुझ से मेवाड़ का शासक बन गया।

महाराणा कुंभा की विजय का वर्णन । महाराणा कुंभा की सांस्कृतिक उपलब्धियां  

मारवाड़ की विजय :- जब 1438 रण मल की हत्या के बाद चुन्डा राणा कुंभा का मुख्य सलाहकार बना चुन्डा की सलाह के अनुसार महाराणा कुंभा ने मारवाड़ पर अधिकार करने का निश्चय किया ओर महाराणा कुंभा ने चुन्डा को मारवाड़ पर अधिकार करने के लिए भेजा चुन्डा ने एक विशाल सेना लेकर मारवाड़ पर आक्रमण कर दिया इस समय मारवाड़ की स्थिति अधिक खराब थी ओर उसकी राजधानी मांडोर पर अधिकार कर लिया इस प्रकार महाराणा कुंभा ने मारवाड़ पर अधिकार कर लिया ।

आबु ओर सिरोही की विजय :- इस समय सिरोही का शासक सैसमल था सैसमल एक वीर योद्धा था ओर एक महत्वकांशी व्यक्ति था उसने महाराणा मोकल की मृत्यु के बाद मेवाड़ राज्य के पिंडवाडा ओर उसके आस पास के कुछ क्षेत्र पर अधिकार कर लिया इसके विपरीत राणा कुंभा सैसमल को नष्ट करने का निश्चय किया लेकिन आबु ओर सिरोही पर आक्रमण करने का मुख्य करना यह था की आबु पर अधिकार कर लेने से गुजरात की ओर से होने वाले आक्रमणों को रोका जा सकता था ओर कुंभा ने आबू ओर सिरोही की विजय के लिए डोडिया सरदार नरसिंह को भेजा जिसने सैसमल को पराजित करके आबू ओर सिरोही पर अधिकार कर लिया इस प्रकार महाराणा कुंभा ने सिरोही ओर आबू पर अधिकार कर लिया ।

डूंगरपुर की विजय :- इस समय डूंगरपुर का शासक गोपीनाथ था ओर गोपीनाथ ने अपनी स्वतन्त्रता की घोषणा कर दी ओर इसके विपरीत मे राणा कुंभा ने करीब 1446 मे डुंगरपुर पर आक्रमण कर दिया ओर डूंगरपुर का शासक गोपीनाथ डर कर भाग गया ओर डूंगर पुर पर महाराणा कुंभा का अधिकार हो गया ।

बूंदी की विजय :- बूंदी के शासक प्रारम्भ मे मेवाड़ के सामंत थे ओर ये सामंत अवसर पाकर स्वतंत्र हो गये कहा जाता है कि जब मालवा के सुल्तान ने गागरौन पर आक्रमण किया था तो बूंदी के शासक ने इसकी सहायता कि जिससे राणा कुंभा अधिक नाराज थे ओर अवसर पाकर कुंभा ने बूंदी पर आक्रमण कर दिया ओर बूंदी पर विजय प्राप्त कर ली ।

मेरो का दमन :- कुंभा के शासन कल के समय मेर जाती कि लोगों ने विद्रोह कर दिया था ओर बदनौर तथा उसके आस पास के क्षेत्रों मे कब्जा कर लिया ओर इसके विपरीत राणा कुंभा ने इनका दमन करने का निश्चय कर लिया ओर महाराणा कुंभा ने सुरतना को मेरो का दमन करने के लिए भेजा सुरतना ने इनका दमन करके मेवाड़ कि शक्ति को बढाया ।

नागौर कि विजय :- नागौर का शासक फिरोज खा था करीब 1456 मे फिरोज खा कि मृत्यु हो गई उसके बाद उसका पुत्र शम्स खा नागौर कि गद्दी पर बेठा लेकिन शम्स खा को हटाकर उसका छोटा भाई मुजाहिद खा ने नागौर पर अधिकार कर लिया ओर शम्स खा को हटा दिया शम्स खा महाराणा कुंभा कि सहायता मे चला गया ओर शम्स खा  ने राणा कुंभा कि सहायता से मुजाहिद खा को मार गिराया ओर महाराणा कुंभा रो शम्स खा के बीच संधि हो गई ।

इस प्रकार राणा कुंभा ने अपनी बहदुरी का परिचय दिया ओर वीर योद्धा कि गणना परम ओर तेजस्वी राणाओ मे कि जाती है महाराणा कुंभा ने केवल विरासत मे मिले राज्य कि रक्षा कि अपितु उसने राज्य कि सीमा का भी विस्तार किया ।    

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *