मध्यकालीन भारत का इतिहास जानने के ग्रंथ

By | May 22, 2020

मध्यकालीन भारत का इतिहास जानने के साधन

ऐतिहासिक ग्रंथ

रेहला ( यात्रा विवरण ):- रेहला के रचियता अब्दुल्ला मुहम्मद उर्फ इब्न बतूता था इब्न बतूता अफ्रीका का निवासी था।

मध्यकालीन भारत का इतिहास

इब्न बतूता करीब 1325 मे अपनी यात्रा आरम्भ की थी और अफ्रीका तथा पश्चिम एशिया के विभिन्न देशो का भ्रमण करते हुये 1332 मे उसने सिंध मे प्रवेश किया भारत मे करीब 14 वर्ष तक रहा इब्न बतूता ने करीब 25 वर्ष  मोरक्को के सुल्तान की सेवा मे व्यतीत किए इब्न बतूता का यात्रा का विवरण रेहला के नाम से प्रकाशित हुआ रेहला मे मुहम्मद तुगलक के चरित्र, सैनिक वयवस्था सामाजिक ओर आर्थिक स्थिति नगरो आदि सभी का ज्ञान प्राप्त होता है। यह ग्रंथ भी मध्यकालीन भारत का इतिहास जानने मे मदद करता है ।

ताजुल मासिर :- ताजुल मासिर के रचियता हसन निजामी थे हसन निजामी ने करीब 1192 से लेकर 1228 तक की घटनाओ का वर्णन इस ग्रंथ मे किया था इस ग्रंथ मे मुहम्मद गोरी के आक्रमण के समय की राजनीतिक स्थिति ओर कुतुबुद्दीन ऐबक तथा इल्तूतमिस के काल के प्रारम्भिक वर्षो के एतिहासिक घटनाओ का वर्णन मिलता है ।

तारीखे फिरोजशाही :- इस ग्रंथ के लेखक जियाउद्दीन बरनी था जो गयासुद्दीन मुहम्मद तुगलक तथा फिरोज तुगलक का समकालीन था ओर यह ग्रंथ 1359 मे पूरा हो गया था जियाउद्दीन बरनी राजस्व के पद पर काम करता था ओर उसने राजस्व का विस्तार से वर्णन किया । मध्यकालीन भारत का इतिहास जानने मे यह ग्रंथ भी अहम भूमिका निभाता है ।

तबकाते नासिर :- तबकाते नासिर ग्रंथ मे मुहम्मद गोरी की भारत विजय से लेकर 1260 तक की घटनाओ का विवरण मिलता है ओर यह ग्रंथ मिनराज सिराज द्वारा लिखा गया था ओर इस ग्रंथ मे अनेक मुस्लिम राजवंशो का इतिहास है ।

फ़ुतूह उल सलातीन :- यह ग्रंथ ख्वाजा अब्दुल्ला मलिक इसामी था ओर इसामी मोहम्म्द तुगलक का समकालीन था ओर इस ग्रंथ मे गजनी के यामिनी वंश के उत्थान से लेकर मोहम्म्द तुगलक के शासन कल तक का वर्णन इस ग्रंथ मे मिलता है ओर इस ग्रंथ के रचना 1350 मे इसामी द्वारा की गयी थी।

फ़ुतूहात ए फिरोजशाही :- फिरोज तुगलक ने स्वम इस ग्रंथ की रचना की थी इस ग्रंथ मे फिरोज तुगलक अपने शासन प्रबंध ओर अपने कल की प्रमुख घटनाओ का वर्णन किया है।

फतवा ए जहाँदारी :- इस ग्रंथ के रचियता जियाउद्दीन बरनी था ओर इस ग्रंथ की रचना का मुख्य कारण तत्कालीन सुलतानों के सम्मुख एक राजनीतिक संहिता का आदर्श प्रस्तुत करना।

तारीखे ए फिरोजशाही :- शम्स ए सिराज द्वारा इस ग्रंथ की रचना की गई थी ओर इस ग्रंथ मे फिरोज तुगलक के शासन का विस्तार से वर्णन किया था।

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