भक्ति आन्दोलन के उपदेशक – Bhakti Andolan Ke Pramukh Sant

By | June 10, 2020

भक्ति आन्दोलन के उपदेशक – Bhakti Andolan Ke Pramukh Sant

01 रामानुजाचार्य

Bhakti Andolan Ke Pramukh Sant भक्ति आन्दोलन के उपदेशको मे रामानुजाचार्य ने सगुण ब्रह्म की उपासना पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विष्णु का नाम स्मरण करने से और उनकी पूजा से मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है ।

02 गुरु रामानन्द

रामानन्द भक्ति आन्दोलन के एक प्रमुख सन्त थे । वे ईश्वर-भक्ति को ही मुक्ति प्राप्त करने का सबसे बड़ा साधन मानते थे। वे ऊंच-नीच और जाति-पांति का तनिक भी भेदभाव नहीं रखते थे ।

03 नामदेव

नामदेव ने जाति-प्रथा और धर्म के बाह्य आडम्बरों का कड़ा विरोध किया । उन्होंने शुद्ध भक्ति पर बल दिया ।

04 वल्लभाचार्य

वल्लभांचार्य कृष्ण के उपासक थे । उन्होंने बाह्य आडम्बरों से दूर रहकर ईश्वर की भक्ति करने का उपदेश दिया | वे कृष्ण को ईश्वर मानकर उसकी भक्ति करतें थे और कृष्ण-भक्ति को मोक्ष का साधन मानते थे ।

05 चैतन्य महाप्रभु

चैतन्य बंगाल के सन्त थे । वे कृष्ण के उपासक थे। वे कृष्ण को ईश्वर मानते थे और कृष्ण-भक्ति को सांसारिक मायाजाल से छुटकारा पाने का साधन मानते थे। उन्होंने भी जाति-प्रथा और ऊंच – नीच के भेदभाव का कड़ा विरोध किया।

05 रैदास

ये रामानन्द के शिष्य थे तथा जाति के चमार थे। इन्होंने भी जाति-प्रथा, छुआछूत,बाह्य आडम्बरों आदि का घोर विरोध किया और सामाजिक समानता पर बल दिया।

06 मीरा

वैष्णव सन्तों में मीराबाई का प्रमुख स्थान है । इन्होंने कृष्ण-भक्ति को सर्वोपरि माना और जाति-प्रथा के बन्धनों का खण्डन किया है

भक्ति आन्दोलन के उपदेशक - Bhakti Andolan Ke Pramukh Sant

भक्ति आन्दोलन के उपदेशक

भक्ति आन्दोलन के उपदेशक – Bhakti Andolan Ke Pramukh Sant

07 कबीर

कबीर भक्ति-आन्दोलन के प्रमुख सन्त थे। उनकी शिक्षाएँ निम्नलिखित है

जाति-प्रथा का खण्डन

कबीर ने जाति-प्रथा और ऊंच-नीच के भेद-भावों की कटु आलोचना की और सामाजिक समानता पर बल दिया ।

धार्मिक आडम्बरों की आलोचना

कबीर ने हिन्दुओं और मुसलमानों के धार्मिक पाखण्डों और आडम्बरों की कटु आलोचना की और शुद्ध आचरण तथा विचारों की शुद्धता पर बल दिया ।

शुभ कर्मों और शुद्ध आचरणों पर बल

कबीर ने व्यर्थ के धार्मिक आडम्बरों, अन्धविश्वासों, तीर्थ-यात्रा, मूर्विपूजा, व्रत आदि की निन्दा की और हृदय की शुद्धता तथा शुभ कर्मों पर बल दिया ।

प्रेम-साधना और वास्तविक ज्ञान पर बल

उन्होने प्रेम-साधना पर विशेष बल दिया। उन्होंने सच्चे ज्ञान की प्राप्ति पर बल दिया क्योंकि सच्चे ज्ञान के माध्यम से ही ईश्वर की प्राप्ति हो सकती है ।

हिन्दू-मुस्लिम एकता पर बल देना

कबीर का दृष्टिकोण समन्वयवादी था। वे हिन्दू व इस्लाम दोनों धर्मों को समान दृष्टि से देखते थे। वे राम और रहीम में कोई अन्तर नहीं मानते थे । वे हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच की खाई पाटना चाहते थे तथा दोनों धर्मों में समन्वय स्थापित करना चाहते थे ।

ईश्वर की भक्ति पर बल

कबीर ईश्वर की निष्काम/भक्ति करने पर बल देते थे और इसी को मुक्ति का साधन मानते थे ।

09 गुरुनानक

गुरुनानक भी भक्ति आन्दोलन के एक प्रमुख सन्त थे। उनकी शिक्षाएं निम्नलिखित थीं

ईश्वर में अदूट विश्वास

गुरुनानक के अनुसार ईश्वर सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापक और परमदयालु है । उनका कहना था कि ईश्वर परमदयालु है जो विपत्तियों और कष्टों में अपने भक्तों की सहायता करता है। अतः मुनष्य को ईश्वर के चरणों में अपना सर्वस्व समर्पित कर देना चाहिए।

सतनाम के जाप

गुरुनानक के अनुसार सच्चे नाम का जप करना प्रत्येक व्यक्ति के लिए परम आवश्यक है । उनके अनुसार केवल ईश्वर ही सत्य है इसलिए उसी के सच्चे नाम की उपासना होनी चाहिए।

जाति-प्रथा तथा ऊँच-नीच के भेद

भाव का विरोध-गुरुनानक ने जाति-प्रथा, अस्पृश्यता तथा ऊँच-नीच के भेदभाव का विरोध किया और सामाजिक समानता पर बल दिया।

भक्ति आन्दोलन के उपदेशक - Bhakti Andolan Ke Pramukh Sant

भक्ति आन्दोलन के उपदेशक

हिदू-मुस्लिम एकता पर बल

गुरुनानक के सामने न कोई हिन्दू था, न कोई मुसलमान, वरन्‌ सब लोग बराबर थे। उन्होंने हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच की खाई को पाटने का भरसक प्रयास किया और दोनों सम्मदायों के लोगों को मिलजुल कर जीवन व्यतीत करने का परामर्श दिया ।

शुद्ध आचरण और सत्कर्मो पर बल

गुरुनानक ने शुद्ध आचरण और सत्कर्मों पर अत्यधिक बल दिया । उन्होंने बाह्याडम्बरों, जैसे तीर्थ यात्रा, ब्रत, माला पहनने,टीका लगाने आदि का विरोध किया और यह उपदेश दिया कि मनुष्य को अपने विचारों में पवित्रता, वाणी में सत्यता तथा कर्मों में शुद्धता लानी चाहिए।

गुरु की महत्ता पर बल

गुरुनानक ने ईश्वर के सच्चे नाम को पाने में गुरु को बड़ा महत्व दिया है। उनका कहना था कि गुरु की शिक्षा से ही मनुष्य प्रभु की वाणी सुन सकता है और ईश्वर के बारे में ज्ञान प्राप्त कर सकता है ।

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