प्रथम विश्व युद्ध कब हुआ था । प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण क्या था

By | March 23, 2020

प्रथम महायुद्ध या प्रथम विश्व युद्ध 1914 में प्रारम्भ हुआ परन्तु युद्ध के आधारभूत कारण बहत पहले से ही विद्यमान थे । उग्र राष्ट्रीयता की भावना,साम्राज्य विस्तार की आकांक्षा, गुटबन्दी और हथियारों की प्रतिस्पर्द्धा आदि के कारण युद्ध के बादल बहुत पहले से ही मण्डरा रहे थे । बिस्मार्क ने अपने कूटनीतिक चातुर्य से 1882 में जर्मनी,इटली और आस्ट्रिया के त्रिराष्ट्रीय गुट का निर्माण किया था परन्तु बिस्मार्क के पतन के बाद कप क्षेत्र में क्रान्तिकारी परिवर्तन हुए।

प्रथम विश्व युद्ध कब हुआ था । प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण क्या था

प्रथम विश्व युद्ध कब हुआ था । प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण क्या था

World War I (पहला विश्व युद्ध)

1907 में त्रिराष्ट्रीय गुट के मुकाबले में इंग्लैंड,फ्रांस और रूस के तिमैत्री हार्दिक संघ का निर्माण हुआ । इस गुटबन्दी के कारण यूरोपीय राष्ट्रों में परस्पर ईर्ष्या, सन्देह और वैमनस्यता की भावनाएँ उत्पन्न हुईं। 1907 के पश्चात्‌ यूरोप में ऐसी अनेक घटनाएँ घंटी जिन्होंने हथियारों की प्रतिस्पर्दधा और गुटबन्दी को और भी प्रबल बना दिया ।

ऐसे अशान्त वातावरण में 28 जून,1914 को आस्ट्रिया के राजकुमार आर्च ड्यूक फरडीनेण्ड की सेरोजेवो में हत्या कर दी गई। इस घटना ने बारुद में चिंगारी का काम किया और 28 जुलाई,1914 को आस्ट्रिया ने सर्बिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी । शीघ्र जर्मनी रूस फ्रांस इंगलेंड आदि देश भी युद्ध मे कूद पड़े इस प्रकार मानव जाति को भयंकर महायुद्ध का सामना करना पड़ा ।

प्रथम विश्व युद्ध के कारण

साम्राज्यवाद एवं आर्थिक प्रतिद्न्द्विता 

प्रो. लेगसेम ने साम्राज्यवाद और आर्थिक प्रतिद्नन्द्िता को विश्व-युद्ध का एक महत्त्वपूर्ण कारण माना है। औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप यूरोप के प्रमुख राज्य अर्थात्‌ इंग्लैंड,फ्रांस,जर्मनी, आदि कच्चा माल प्राप्त करने एवं अपने तैयार माल को बेचने के लिए नये बाजारों की तलाश में थे। अतः 1870 के बाद यूरोपीय राब्यों में अफ्रीका और एशिया के विभिन्‍न भागों में उपनिवेश स्थापित करने की प्रतिस्पर्द्धा आरम्भ हो गई । यद्यपि अफ्रीका के विभाजन के लिए कोई युद्ध नहीं लड़ा गया किन्तु उसके कारण यूरोपीय राज्यों में पारस्परिक तनाव में वृद्धि अवश्य हुई । इटली और फ्रांस तथा इंग्लैंड और फ्रांसके बीच. मूलतः औपनिवेशिक समस्याओं के कारण कटुता उत्पन हुई ।

राष्ट्रीयता की भावना

जर्मनी, फ्रांस, इंग्लैड, इटली आदि देशों में उम्र राष्ट्रीयता की भावना का अधिक प्रचार था । प्रत्येक देश अपनी सभ्यता और संस्कृति को ही सर्वश्रेष्ठ समझता था और अन्य देशों एवं उनकी संस्कृतियों को पुच् च्छ मानता था। उग्र राष्ट्रीयवा की भावना-के कारण फ्रांसीसी जर्मनी से लोरेन तथा अल्लास के प्रदेश वापस लेने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ थे। बाल्कन राज्यों में भी उम्र राष्ट्रीयवा का उदय हो चुंकां था। बल्गारिया ने ‘वृहत्‌ बल्गारिया’ के निर्माण के लिए विस्तारवादी नीति अपनाई। इसी प्रकार रूस में सर्व-स्लाववादियों ने स्‍लाव जाति को संगठित करने एवं शक्तिशाली बनाने के लिए बहुत प्रचार किया। अतः उम्र राष्ट्रीयता की भावना के कारण विभिनन राष्ट्रों के बीच घृणा और द्वेष की भावना फैली हुई थी।

गुप्त सन्धियाँ

फ्रांस की पराजय के बाद बिस्मार्क ने गुटबन्दी की प्रथा का प्रारम्भ किया। अतः उसने 1882 में त्रिराष्ट्रीय गुट का निर्माण किया जिसमें जर्मनी,इटली और आस्ट्रिया- सम्मिलित थे | विलियम द्वितीय की अदूरदर्शिता के कारण 1907 में रूस, इंग्लैंड और फ्रांस के मध्य त्रिमैत्री हार्दिक संघ का निर्माण हुआ और समस्त यूरोप दो विरोधी सशख्र गुटों में विभाजित हो गया। इस गुटबन्धी और गुप्त-संधियों की प्रणाली ने अनेक राष्ट्रों के मध्य घृणा, अविश्वास, ईर्ष्या और वैमनस्यता की भावना उत्पन्न की और हथियारों की होड़ को तीव्र बनाया।

अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का अभाव

प्रथम विश्व युद्ध के पूर्व विभिन्‍न राष्ट्रों में सीमा सम्बन्धी विवाद प्रचलित थे। परन्तु दुर्भाग्य से उस समय यूरोप में अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का अभाव था जो विभिन देशों के आपस के झगड़ों का समाधान कर महायुद्ध को रोकने का प्रयास करता। अतः प्रत्येक राष्ट्र अपने विवादों को सैनिक शक्ति के बल पर सुलझाने का प्रयल करने लगा।

हथियारों की होड़

यूरोप के शक्तिशाली देंश हथियारों की दौड़ में भाग ले रहे थे । प्रत्येक देश अपनी सैनिक शक्ति में वृद्धि करने के लिए प्रयलशील था। जर्मनी के सम्राट विलियम द्वितीय ने जर्मनी को सैनिक दृष्टि से सर्वशक्तिशाली बनाने का प्रयल किया जिसके परिणामस्वरूप 94 तक जर्मन सैनिकों की संख्या 8,50,000 तक पहुँच गई। फ्रांस ने भी अधिक से अधिक सैनिकों को युद्ध के लिए तैयार किया । जर्मनी ने नौ-सेना को बढ़ाने तथा उसे शक्तिशाली बनाने का प्रयल किया। इंस प्रकार सैन्यवांद एवं शज््नीकरण की प्रतिस्पर्द्धा के कारण सर्वत्र भय, आशंका एवं पारस्परिक घृणा का वातावरण बना हुआ था ।

प्रथम विश्व युद्ध कब हुआ था । प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण क्या था

प्रथम विश्व युद्ध कब हुआ था । प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण क्या था

जर्मनी और इंग्लैंड के मध्य शत्रुता

जर्मन सम्राट विलियम द्वितीय की अदूरदर्शिता और उम्रवादिता के कारण जर्मनी और इंग्लैण्ड के मध्य शत्रुता बढ़ती चली गई। इंग्लैंड द्वारा अफ्रीका में औपनिवेशिक विस्तार करना विलियम द्वितीय के लिए असह्य था। 1896 में ट्रांसवाल में जेम्सन के सैनिक अभियान की असफलता पर विलियम द्वितीय ने राष्ट्रपति क्रूगर को: तार भेजा जिससे इंग्लैण्ड की जनता में जर्मनी के प्रति आक्रोश उत्पनन हुआ। इसके अतिरिक्त जर्मन सम्राट ने अपनी नौ-सेना-का विस्तार करना शुरू कर दिया। फलतः इंग्लैण्ड ने भी अपनी नौ-सेना का विस्तार करना प्रारम्भ कर दिया जिससे दोनों देशों के बीच कटुता बढ़ने लगी। विलियम द्वितीय ने तुर्की के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध स्थापित किये और 1902 में तुर्की से समझौता करके बर्लिन से बगदाद तक एक रेलवे लाइन बनाने का अधिकार प्राप्त कर लिया | इंग्लैंड ने इसका घोर विरोध किया क्योंकि उसे जर्मनी से अपने उपनिवेशों-मिस्न और भारत, को खतरा पैदा हो गया था।

विलियम द्वितीय की महत्वाकांक्षाएँ

जर्मन सम्राट विलियम द्वितीय एक महत्वाकांक्षी व्यक्ति था। वह जर्मनी को समस्त विश्व की प्रधान शक्ति बनाने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ था। वह गर्व से कहा करता था कि, ‘मेरा उद्देश्य विश्व-शक्ति प्राप्त करना अथवा पतन के लिए तैयार रहना है ।” उसने घोषित किया. था कि विश्व में कहीं पर भी कोई ऐसा कार्य नहीं होना चाहिए जिसमें जर्मनी की सम्मति न ली जाए। इस प्रकार अपने उम्र तथा साम्राज्यवादी चरित्र द्वारा विलियम द्वितीय ने यूरोप को युद्ध तक पहुँचाने में बहुत योग दिया ।

समाचार-पत्रों का प्रभाव

उस समय सभी राष्ट्रों के समाचार-पत्र उम्र राष्ट्रीयता से प्रेरित होकर घटनाओं ० 3 कल. कर प्रस्तुतु करते थे और जनमत को भड़काते थे । वे अपनी संस्कृति को श्रेष्ठ तथा अन्य देशों को सं सिद्ध करने का प्रचार कर रहे थे । ये समाचारू-पत्र अपने प्रतिद्नन्द्वी राष्ट्रों पर कीचड़ उछालते रहते थे जिससे इन राष्ट्रों के बीच कटुता बनी रहती थी। फ्रांस और जर्मनी सम्बन्धों को बिगाड़ने में फ्रांस के समाचार-पत्रों का बड़ा प्रभाव रहा ।

प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण क्या था

तात्कालिक कारंण

आस्ट्रिया के राजकुमार की हत्या-28 जून, 1914 का आस्ट्रिया के राजकुमार आर्च ड्यूक फर्डनिण्ड तथा उसकी पत्नी की बोस्निया की राजधानी सेरोजेवो में हत्या कर दी गई । उस घटना से आस्ट्रिया में सर्बिया के विरुद्ध तीव्र आक्रोश उत्पन्न हुआ | अतः23 जुलाई, 1914 को आस्ट्रिया ने सर्बिया को एक अल्टीमेटम भेजा और 48 घण्टों के अन्दर उसकी शर्तों को पूरा करने के लिए कहा गया । यद्यपि सर्बिया ने अधिकांश शर्तों को स्वीकार कर लिया था परन्तु उसने यह शर्त मानने से इन्कार कर दिया था कि आस्ट्रिया के अधिकारियों को सर्बिया में जाँच-पड़ताल में भाग लेने की अनुमति दी जाए।

अतः आस्ट्रिया ने सर्बिया के उत्तर को असन्तोषजनक मानते हुए 28 जुलाई, 1914 को उसके विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी । रूस ने सर्बिया का पक्ष लेते हुए आस्ट्रिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी । जर्मनी ने आस्ट्रिया का साथ दिया और 1 अगस्त, 1914 को रूस के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी । इंग्लैण्ड और फ्रांस भी जर्मनी के विरुद्ध युद्ध में कूद पड़े । इस प्रकार प्रथम महायुद्ध शुरू हुआ ।

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