गुलाबी नगर (जयपुर) शहर की जानकारी

By | May 24, 2020

राजस्थान के इतिहास मे गुलाबी नगर (जयपुर) का विवरण

जयपुर ( गुलाबी नगर ) जो कि राजस्थान कि राजधानी ओर पूर्व का पेरिस कहा जाने वाला ये शहर विश्व प्रसिद्ध है। ओर इस शहर को पिंक सिटी के नाम से भी जाना जाता है राजस्थान के इस सुंदर शहर की स्थापना 18 नवम्बर 1727 को कछवाहा वंश के महाराजा सवाई जयसिंह दितिया की गई थी ओर जयपुर नगर के वास्तुकार श्री विध्याधर थे जयपुर का गुलाबी रंग रामसिंह दितिया द्वारा अल्बर्ट (वेल्स ) आगमन के उपलब्ध मे करवाया गया था ।

जयपुर के प्रमुख स्थल

हवामहल – हवामहल जो की जयपुर का सबसे सुदर महल है ओर हवामहल का निर्माण महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने 1799 मे करवाया था ओर हवामहल जो कि पाँच मंजिली इमारत है ।

जन्तर मन्तर – जन्तर मन्तर का निर्माण जयपुर शहर कि स्थापना से पहले कराया गया था इसका निर्माण सवाई जयसिंह द्वारा 1734 मे हुआ था जयपुर शहर का ये खूबसूरत पेलेस जो कि विश्व प्रसिद्ध महत्व रखता है। भारत देश मे सबसे पहली वेधशाला दिल्ली मे बनाई गई थी इसके बाद उज्जैन बनारस ओर मथुरा मे बनाई गई थी जयपुर कि वेध शाला जो कि सबसे विशाल ओर विख्यात है ।

रामनिवास बाग – रमनिवास बाग का निर्माण भी सवाई जयसिंह द्वारा करवाया गया था एसा कहा जाता है इसका निर्माण अकाल राहत कार्यो के अंतर्गत 4 लाख रुपेय कि लागत से महाराजा जयसिंह रामसिंह द्वारा कराया गया था ।

सिटी पेलेस – सिटी पेलेस जपुर के परकोटे के कुल क्षेत्र के सतवे हिस्से मे स्थित है इसमे प्रवेश करने का मुख्य रास्ता त्रिपोलिया गेट है। सिटी पेलेस जो कि परम्परागत राजस्थानी एवं मुगल शैली कि स्थापत्य काला पर बना हुआ है इसमे मुबारक महल दीवाने-ए खास ओर दीवान ए आम है ।

जलमहल – जल महल जो कि जयपुर ओर आमेर के मार्ग पर स्थित है इसका निर्माण का श्रेय भी सवाई जयसिंह को जाता है कहा जाता है कि सवाई जयसिंह ने जयपुर कि जलापूर्ति के लिए गर्भावाती नदी पर बांध बनवाकर मनसागर तालाब बनवाया था। ओर इस जलमहल के बारे मे यहा भी कहा जाता है कि सवाई जयसिंह ने अश्वमेघ यज्ञ मे आमंत्रित ब्राह्मणो के भोजन ओर विश्राम कि व्यवस्था इसी जलमहल मे कारवाई थी ।

 

नाहरगढ़ का किला – नाहरगढ़ के किले का निर्माण 1734 मे सवाई जयसिंह ने करवाया था ओर इसको वर्तमान स्वरूप 1868 मे स्वाइ रामसिंह ने दिया नहरगढ़ किले कि नीचे जयपुर के पूर्व महाराजाओ कि सगमरमर कि सुदर एवं कलात्मक छतरिया भी बनी हुई है । नाहरगढ़ का किला का किला राजस्थान के इतिहास मे विशेष स्थान रखता है।

गलता – शहर कि पूर्व पहलिया के बीच गलता एक तीर्थ स्थल है गलता कुंड मे सदेव गौमुख से पानी बहता रहता है
जयपुर को छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है जयपुर शहर मे कई बड़े मंदिर है जिसमे नाहरगढ़ के गणेशजी एवं मोती डूंगरी का गणेश जी का मंदिर राम मंदिर ताड़केशवर जी का मंदिर ओर जामा मस्जिद आदि है।

ओर इस शहर यानी गुलाबी नगर मे विश्व का सबसे बड़ा चाँदी का पत्र भी रखा जाता है जयपुर मे मुबारक महल भी स्थित है जो कि अपनी सुदरता के लिए प्रसिद्ध है ।

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