दक्षिण अफ्रीका मे गांधीजी का सत्याग्रह

By | May 24, 2020

गांधीजी का दक्षिण अफ्रीका मे सत्याग्रह का प्रारम्भ केसे हुआ था ।

गांधीजी का अहिंसा के बारे मे विचार था की अहिंसा मानव का प्राकृतिक गुण है गांधीजी का विचार था कि मानुषी स्वभाव से अहिंसा प्रिय है ओर वह परिस्थितियोवश से हिंसावान बनाता है ।

जब महात्मा गांधीजी राजकोट ओर बंबई से वकालत करने के बाद 1893 ई मे (डरबन) दक्षिण अफ्रीका पहुचे तब गांधीजी को दादा अब्दुल्ला एंड कंपनी कि ओर से 105 पौंड वार्षिक वेतन पर दक्षिण अफ्रीका मे एक कंपनी कि तरफ से मुकदमा लड़ने का प्रस्ताव मिला ओर बस क्या था ।

गांधीजी का सत्याग्रह,दक्षिण अफ्रीका

गांधीजी ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गांधीजी एक मात्र पहले वकील थे जिनहोने दक्षिण अफ्रीका मे नाटाल के सर्वोच्च न्यायलय मे अधिवक्ता के रूप मे पंजीकृत किए गए थे महात्मा गांधीजी 1914 तक दक्षिण अफ्रीका मे रहे ओर वहा के लोगो मे हिंसा के मार्ग मे जाग्रति जगाने मे एक अच्छी भूमिका रही ।

गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका मे हो रही रंग भेद की नीति का विरोध किया ओर भारतीयो के साथ हो रहे दुरवेवहार के खिलाफ आवाज उठाई करीब 1914 मे भारतीयो कि दशा अधिक खराब थी दक्षिण अफ्रीका मे भारतीयो को असभ्य ओर जंगली समझा जाता था ओर गोरे लोग भारतीयो के साथ घृणा करते थे ओर बस क्या था गांधीजी ने निश्चय किया कि इस अन्याय के विरुद्ध संघर्ष कर के ही इस को दूर किया जा सकता है ओर उस समय एशियावासियों कि विरुद्ध कठोर कानून बनाए गए थे तब गधीजी ने घोषणा कि, की हम इसका सामना करेंगे ओर इसके सामने झुकने से इन्कार करेंगे ओर गांधीजी ने इसका युद्ध आत्मा की तलवार ( अहिंसा ) से तब तक लड़ा जब तक विजय प्राप्त नहीं हो गयी ।

गॉंधी जी को रेलयात्रा के दोरान उनके पास प्रथम श्रेणी का टिकट होते हुये भी उन्हे प्रथम श्रेणी मे यात्रा न करने के लिए बाध्य किया गया ओर जब गांधी जी ने प्रथम श्रेणी के डिब्बे से उतरने से मना कर दिया तब गांधीजी को बलपूर्वक धक्का देकर उतार दिया गया ओर गांधी जी का सामान भी बाहर फेक दिया ओर इस घटना का प्रभाव गांधीजी पर अधिक पड़ा ओर गांधी जी ने इस प्रकार भारतीय जनता के स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष करना अपना नैतिक कर्तव्य समझा ओर उन्होने दक्षिण अफ्रीका मे रह कर वहा भारतीयो के साथ हो रहे अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने का निश्चय किया ।

ओर गांधीजी ने प्रवासी भारतीयो को इकठ्ठा कर के उन्होने 1894 मे नाटाल इंडियन कांग्रेस की स्थापना की ओर इस प्रकार महात्मा गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका मे सत्यागृह का बिगुल बजा दिया। इसके बाद गांधीजी ने डबरन के पास फीनिक्स आश्रम की स्थापना की ओर आंदोलनकारियों के समुदाय को संगठित किया ।

इस प्रकार गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका मे पहली बार सत्यागृह का पहली बार प्रयोग किया गांधीजी द्वारा सुरू हुआ इस सत्यागृह के फलस्वरूप दक्षिण अफ्रीका की गोरी सरकार ने भारतीयो के अनेक अधिकारों को कानूनी स्वीकृति प्रदान की ओर यह सत्यागृह 8 वर्ष तक चलता रहा इस प्रकार गांधी जी ने सारे सत्याग्रह आंदोलन के दोरान महात्मा गांधी ने सहिष्णुता ओर निडरता का परिचय दिया ।

साबरमती आश्रम,सत्यागृह

ओर गांधीजी जब दक्षिण अफ्रीका से 1915 मे भारत लोटने पर ब्रिटिश सरकार ने गांधी जी को केसरे-हिन्द स्वर्ण पदक प्रदान किया ओर गांधी जी भारत लोटते ही साबरमती नदी के किनारे सत्यागृह आश्रम की स्थापना की जो कि बाद मे यह आश्रम साबरमाती आश्रम कि नाम से प्रसिद्ध हुआ ।

 

इस प्रकार गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका मे रहकर रंग भेद कि नीति को समाप्त किया ओर भारतीयो के साथ मे हो रहे दुरवेवहार का विरोध किया।  

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