राणा सांगा और बाबर का युद्ध। खानवा का युद्ध

By | May 12, 2020

खानवा की लड़ाई (Battle of Khanwa 16 मार्च 1527)

बाबर ओर राणा सांगा ने एक दूसरे पर प्रतिज्ञाभंग का आरोप लगा रहे थे जिसके कारण खानवा की लड़ाई की सुरुआत हुई पानीपत की लड़ाई से पहले राणा सांगा ने वचन दिया था की वह आगरा पर आक्रमण करेगा लेकिन उसने अपने वचन का पालन नहीं किया दूसरे ओर बाबर पर आरोप लगाया की उसने कलापी, धोलपुर और बयाना पर अधिकार कर लिया था जबकि संधि की शर्तो के अनुसार ये प्रदेश उसे राणा को मिलने चाहिए थे इस प्रकार दोनों के बीच युद्ध की स्थति उत्पन्न हो गई ।

बाबर ओर राणा सांगा दोनों ही वीर योद्धा थे मेवाड़ के शासक राणा सांगा ने सारे उतरी भारत मे अपने परकरम ओर शोरया की धाक स्थापित कर दी थी ओर बाबर भली तरह से जनता था कि भारत मे मुगल साम्राज्य की जड़ो को द्र्द्तापूर्वक स्थापित करने के लिए राणा सांगा की शक्ति को समाप्त करना अत्यंत आवशयक है।

दूसरी ओर राणा सांगा भी बाबर की बढ़ती हुई शक्ति से चिंतित था बाबर तो भारत मे अपना पाव जमाना चाहता था।

बाबर ने पानीपत की लड़ाई मे अफगानों को पराजित कर दिया लेकिन उसकी शक्ति पूर्ण रूप से नष्ट नहीं हुई ओर अफगान सरदार लोदी राणा सांगा से जा मिला था।

बाबर ने अपने आपको इस्लाम धर्म का सरंक्षक मानता था उसने राणा सांगा के विरुद्ध इस युद्ध को जिहाद का रूप दिया तथा घोषणा की कि वह इस्लाम धर्म कि मान प्रतिष्ठा के लिए युद्ध लड़ रहा था दूसरी ओर राणा सांगा भी हिन्दू धर्म ओर संस्कृति कि रक्षा करने के लिए सब कुछ न्योछावर करने के लिए तैयार था।

खानवा का युद्ध (Battle of Khanwa) की लड़ाई तैयारी ( 16 मार्च 1527 )

सभी कारणो से युद्ध होना स्वाभाविक था दोनों पक्षो ने युद्ध कि तैयारी शुरू कर दी राणा सांगा ने आगे बढ़ कर बयाना पर अधिकार कर लिया ओर मुगलो कि एक सेनिक टुकड़ी को पराजित कर भागा दिया इससे बाबर कि सेना एक भय ओर आतंक का वातावरण स्थापित हो गया ।

इसके विपरीत बाबर ने अपनी सेना लेकर खानवा के मेदान मे मोर्चा लगा दिया यहा खाइया खोदी गयी तोपो कि गाड़ियो को जंजीर से बांध कर आगे रखा गया तथा घुडसवारों  ओर बंदूकचियो को उसी तरह जमाया गया जैसे कि पानीपत के मेदन मे जमाया गया था।

महाराणा सांगा भी बाबर का मुक़ाबला करने के लिए आगे बड़ा महाराणा सांगा की सेना 80 हजार से अधिक नहीं थी ओर राणा सांगा 13 मार्च 1527 को खानवा के निकट आ गया।

(Battle of Khanwa 16 मार्च 1527)

 

खानवा का युद्ध

( Khanwa Ka Yudh Kaha Hua )

16 मार्च 1527 को करीब 9 बजे खानवा के मेदान  (फ़तेहपुर सीकरी से 10 मिल ओर आगरा से करीब 37 मिल दूर स्थित है) मे युद्ध की रणभेरी बज उठी आरंभ मे राजपूतो ने मुगलो को बड़ी हानी पहुचई लेकिन बाबर ने शीघ्र ही स्थिति को संभाल लिया ओर लेकिन राजपूतो ने मुगलो पर भयंकर प्रहार किया लेनिक बाबर का तोपखाना उनके लिए प्रलयंकारी सिद्ध हुआ राजपूत सेनिक तोपों के आगे टिक नहीं पाये महाराणा सांगा एक तीर लाग्ने से घायल हो गए ओर उसे युद्ध क्षेत्र से बाहर ले गए हजारो राजपूत युद्ध मे वीर गति को प्राप्त हुये।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *